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नई दिल्लीः धारा 370 हटने के बाद से जम्मू कश्मीर में जहां पूरी सख्ताई बरती जा रही है और धारा 144 लगाई गई है, जिससे लोगों का बाहर आना जाना मुश्किल हो चुका है। ऐसे में एक आईएस अफसर ने अपनी नौकरी इसलिए छोड़ दी कि जम्मू कश्मीर में लोगों को ऐसे माहौल में मूलभूत अधिकारों  से वंचित रखा जा रहा है और एक सच्चा नागरिक होने के नाते उन्हें ये नौकरी छोड़ देनी चाहिए।

33 साल के कन्नन गोपीनाथ ने अपनी IAS की नौकरी को ठोकर मार दी है। गोपीनाथ का कहना है कि जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा खत्म करके वहां के लोगों की मूलभूत अधिकारी छीन लिये गए हैं। गोपीनाथ ने कहा कि मेरे इस्तीफे से कोई फर्क तो नहीं पड़ेगा लेकिन  अंतर्रात्मा को आवाज देनी होती है। ऐसा लगता है कि बाकी का भारत इस में पूरी तरह से सहमत है, ये हमारा 2019 का भारत है और ये सब इसी में हो रहा है। उन्होनें कहा कि मुझे लगता है कि धारा 370 को हटाना कोई बड़ा मुद्दा नहीं लेकिन किसी के मौलिक अधिकार छीन लेना मुख्य मुद्दा है। अब इस पर विरोध किया जाए या फिर इसका स्वागत किया जाए, ये तो लोगों पर निर्भर करता है। मुझे इस फैसले ने आहत किया और इस फैसले के विरोध के लिए मेरा इस्तीफा ही काफी है। 

आपको बता दें कि 33 वर्षीय आईएएस अफसर कन्नन गोपीनाथ दादर नगर हवेली में कई मुख्य विभागों में सचिव हैं और उन्होंने घाटा झेल रही एक सरकारी बिजली कंपनी के फायदे में ला दिया था। लेकिन 7 साल तक भारतीय प्रशासन सेवा में काम करने के बाद उन्होंने 21 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है।
 

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Web Title: IAS officer has leave his job by disturbing about decision on Kashmir

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