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जम्मूः अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से जम्मू कश्मीर में इंटरनेट और मोबाइल की सेवा बंद कर दी गई थी और साथ ही धारा 144 भी लगा दी गई थी। इतनी सारी पाबंदियां लगने के बाद किसी का इंटरनेट चलना हैरानी की बात है। लेकिन अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी ने ट्विटर पर एक पोस्ट डाली, जिसके बाद बीएसएनएल के दो अधिकारी शक के घेरे में आ गए। गिलानी को इंटरनेट पर रोक लगने के बाद भी कैसे इंटरनेट एक्सेस दिया गया, इसके बारे में जांच पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों को यह भी पता नहीं चल सका कि गिलानी कश्मीर में इंटरनेट एक्सेस कर रहे हैं या नहीं,  उन्होंने अपने अकाउंट से ट्वीट किया था। इस बाबत जांच शुरू की गई थी कि गिलानी कैसे इंटरनेट और लैंडलाइन सुविधा पाने में सक्षम थे। बीएसएनएल ने इस संबंध में दो अधिकारियों पर एक्शन लिया है। अधिकारियों के लूप होल्स के बारे में पता चलने के बाद से गिलानी की सर्विस बंद कर दी गई थी।

गौरतलब है कि गिलानी अपने अकाउंट से लगातार भारत विरोधी पोस्ट करते रहे हैं। कई यूजर्स तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से गिलानी को पाकिस्तान भेजने तक की मांग कर चुके हैं। पिछले महीने (जुलाई में) उनके प्रवक्ता गुलजार अहमद गुलजार को भी जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। 

फिलहाल घाटी में फोन सेवाएं धीरे-धीरे बहाल हो रही हैं। यहां पर स्कूलों को खोला गया है और धारा 144 में ढील दी गई है। करीब 14 दिन बाद घाटी में स्कूल-कॉलेज खुलने जा रहे हैं, ऐसे में एक बार फिर सुरक्षाबलों के लिए शांत माहौल बनाने की चुनौती है।

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Web Title: Geelani's internet was running in J and K despite ban

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