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शिमला: बिशप कॉटन स्कूल शिमला (बीसीएस) में फोडा फेस्टिवल आफ द डिफरेंटली एब्लड वार्षिक समारोह में पहुंचे विशेष व दिव्यांग बच्चों की आंखों में खुशी और आशाओं की चमक देखने के बाद कहा जा सकता है कि ये बच्चें प्रतिभावान है और इन्हें हर तरह से मदद दी जानी चाहिए। फोडा फेस्टिवल में भाग लेने वाले विशेष बच्चों में कई ऐसे हैं जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद बच्चों की प्रतिभा देख फोडा में पहुंचा हरेक दंग दिखाई दिया। दबे स्वरों में सभी का यही कहना था कि विशेष व दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को बढ़ाने, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए न केवल सामाजिक संस्थाएं बल्कि समाज के हर एक वर्ग को आगे आना चाहिए।

प्रदेश में चल रही दिव्यांग व विशेष बच्चों के लिए संस्थान अपने स्तर पर उनके सर्वांगीण विकास के लिए कार्य रही है, लेकिन फिर भी यहां उतनी सुविधा नहीं है जितनी होनी चाहिए। आशा किरन बिलासपुर स्कूल में दिव्यांग व विशेष छात्राओं के लिए गर्ल्स हॉस्टल की दरकार है। इस स्कूल में वर्तमान में 25 दिव्यांग छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें से कुछ छात्र को आंख से कम दिखता है, कुछ बोल नहीं सकते तो कुछ सुन नहीं सकते है। जिनके लिए आशा किरन बिलासपुर में 21 कमरों की व्यवस्था है। इन्हीं कमरों में छात्रों की पढ़ाई, थैरेपी, वोकेशनल कक्षाएं आदि लगती है। इनमें से कुछ कमरे छात्रों के रहने के लिए भी है।

वहीं इस स्कूल में पहले छात्राएं भी थी लेकिन बताया जा रहा है कि यहां पर भवन की व्यवस्था न होने के चलते छात्राओं को नहीं लिया गया। आशा किरन बिलासपुर स्कूल की विशेष अध्यापिका निशा का कहना है कि विशेष व दिव्यांग लड़कियों के रहने की व्यवस्था के लिए गर्ल्स हॉस्टल की जरूरत है। जिससे यहां पर और भी विशेष छात्रों को प्रवेश दिया जा सके और उनके विकास के लिए कार्य किया जा सके। सोलन रोशनी डे केयर से ज्योति शर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी यहां के बच्चों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

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Web Title: Future shine in special children's eyes at Foda Festival

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