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मुख्याध्यापक अधिकारी संवर्ग संघ के प्रदेशाध्यक्ष विजय गौत्तम, प्रदेश पदोन्नत प्रवक्ता संघ के प्रदेशाध्यक्ष रत्नेश्वर सलारिया, केवल ठाकुर, यशवीर पटियाल, रविदास, विज्ञान अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय शर्मा, अमृत महाजन, राजीव राठौर, सुखविंद्र सिंह, चंद्रकेश धीमान, नरेंद्र ठाकुर, सुरेंद्र कश्यप, प्रशिक्षित कला स्नातक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल, मदन ठाकुर, संजय ठाकुर, ओमप्रकाश सहित समूची कार्यकारिणी ने सरकार विशेषतौर पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज व शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से आग्रह किया है कि वे न्याय करते हुए वर्तमान नियमों से झूठे प्रचार के कारण संशोधन न करें। मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में पदाधिकारियों ने कहा कि हर बार सरकारों और विभाग का डंडा टी.जी.टी. कैडर के विरुद्ध ही क्यों चलता है? मुख्याध्यापकों के पद 1459 में से 822 तक ही सिमट गए हैं। मुख्याध्यापकों के पद कम होने के कारण टी.जी.टी. जो पहले से ही पोस्ट ग्रेजुएट हैं, लेकिन कमीशन पास कर और स्थाई नौकरी पाने के चक्कर में टी.जी.टी. बने थे, मजबूरी में लैक्चरर के पद पर परिस्थितियों को कोसते हुए टी.जी.टी. कैडर छोड़ रहे हैं। कारण टी.जी.टी. काम और चार्जों से लदा हुआ है, सांस लेने की भी फुर्सत नहीं है, दबाव ही दबाव। यह विडम्बना ही है कि पहले मुख्याध्यापकों के पदों को 12वीं  बनाकर समाप्त कर दिया जाए और फिर घटी हुई संख्या को नियमों की गलत और कुल्किपूर्ण व्याख्या कर उनका कोटा और घटा दिया जाए। भेदभाव और गलत नीतियों के कारण पांच पांच कक्षाओं के 2-2 बोर्ड विषयों को पढ़ाने वाले आज 29 वर्ष के कार्यकाल के बाद भी पहली पदोन्नति को तरस रहे हैं।ऐसे में 50:50 के निर्धारित कोटे में छेड़छाड़ बड़े अन्यायपूर्ण विवाद की शुरुआत बन सकती है

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Web Title: Every time T.G.T. Why do governments and departments run against cadre?

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