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पानीपत : नियम 134ए के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिले को लेकर नई-नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग द्वारा पास हुए बच्चों को 1 मई को स्कूल अलॉट किए गए थे और उनमें से भी बहुत से पास हुए बच्चों को स्कूल अलॉट नहीं किए गए थे, जिसके लिए बीईओ व डीईओ कार्यालय द्वारा 17 मई को दूसरी स्कूल अलॉटमैंट की लिस्ट जारी करने की बात कही गई थी। वहीं जिन बच्चों को 1 मई को स्कूल अलॉट कर दिए गए थे तो उन बच्चों को भी ज्यादातर स्कूलों ने दाखिले नहीं दिए थे और उपायुक्त ने 8 मई को पानीपत के निजी स्कूल संचालकों व प्रिंसिपलों की बैठक बुलाकर उन्हें सख्ती के साथ बच्चों के दाखिले करने का कहा गया था। उपायुक्त सुमेधा कटारिया व डीईओ बिजेंद्र नरवाल के दबाव के चलते ज्यादातर बच्चों ने इन बच्चों को दाखिले देने शुरू कर दिए थे और 1 मई को स्कूल अलॉटमैंट वाले ज्यादातर बच्चों के दाखिले हो चुके थे। वहीं निजी बच्चों में दाखिला होने पर अभिभावकों ने अपने बच्चों के लिए स्कूल की किताबें, ड्रेस व जिन्होंने बस लगवाई थी, वे बस की भी फीस भर चुके थे लेकिन बहुत से अभिभावकों के पास फोन आया है कि आपके बच्चे को अलॉट किए गए स्कूल में दाखिला रद्द कर दिया गया है और दूसरा स्कूल अलॉट किया गया है। हालांकि अनेकों बच्चंे को तो दाखिला रद्द करके कोई दूसरा स्कूल अलॉट भी नहीं किया गया।

वहीं स्कूल रद्द व चेंज होने की सूचना पर दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन के जिला अध्यक्ष सोकेंद्र बालियान, दलबीर भौंसले व अभिभावक बुधवार को लाल बत्ती के पास बी.ई.ओ. कार्यालय पहुंचे। वहां पर बी.ई.ओ. राकेश बुरा नहीं मिले तो बच्चे व अभिभावक पैदल ही रोष व्यक्त करते हुए लघु सचिवालय की 5वीं मंजिल स्थित डीईओ बिजेंद्र नरवाल के कार्यालय में करीब 12 बजे पहुंचे पर वे भी नहीं मिले तो अभिभावक उनके कार्यालय के बाहर ही लघु सचिवालय में धरना देकर बैठक गए। वहीं करीब दो बजे डीईओ बिजेंद्र नरवाल अपने कार्यालय आए तो उन्होंने बच्चों के अभिभावकों के साथ करीब आधा घंटे तक बैठक की। 

सोकेंद्र बालियान व अभिभावकों ने डीईओ के सामने दाखिला ले चुके बच्चों के स्कूल चेंज नहीं करने व दाखिले रद्द नहीं करने की मांग रखी। जिस पर डीईओ ने कहा कि यह काम उनके हाथ में नहीं है और शिक्षा निदेशालय पंचकूला से ही बच्चों के स्कूल चेंज व दाखिले रद्द हुए है। उन्होंने कहा कि यदि कोई निजी स्कूल बच्चों को दाखिला नहीं दे रहा है तो वे तो उसके खिलाफ तो कार्रवाई कर सकते है लेकिन निदेशालय द्वारा लिए गए फैसले में वे कुछ नहीं कर सकते। जिससे अभिभावक संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने कहा कि उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जबकि इन बच्चंे का पहले ही करीब डेढ़ माह पढ़ाई का समय निकल चुका है। यदि इस तरह से इनका स्कूल चंेज या दाखिला रद्द किया तो ये बच्चे कैसे पढ़ाई कर पाएंगे।

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Web Title: Parents agitated for the change of school admissions and cancellation of admission

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