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अंबाला : गांव सौंडा में रहने वाले गांववासियों द्वारा मूलभूत सुविधाओं की मार ङोलना सरकार के अच्छे दिनों के वादों पर एक बहुत बड़ा तमाचा जड़ता  है। जन चेतना फाऊंडेशन एनजीओ के अध्यक्ष हरपाल कंबोज ने जब गांव निवासी सुदेश राधा की आपबीती सुनी, तो सामाजिक सुरक्षा कानून का दावा करने वाली मौजूदा सरकार के सारे वादे धरे के धरे रह गए। सुदेश राधा ने बताया कि वह 2 सालों से प्रशासन अधिकारियों से गुहार लगा रही है। उसकी मकान की न चारदीवारी है, न स्नान घर में छत है। वह प्रशासन अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक चुकी है। लेकिन अधिकारियों द्वारा उसकी समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। महिला ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार क्या काम कर रही है? क्यों अभी भी गरीब जनता परेशानियों की मार ङोल रही है।

उसे सिर्फ  2000 की पैंशन मिलती है लेकिन क्या सिर्फ  2000 में आज इस महंगाई के दौर में कोई अपना गुजारा कैसे चला सकता है। सुबोध राधा ने आगे कहा कि यदि सरकार इसी तरह आम जनता की परेशानियों से मुंह मोड़ती रहेगी तो वह दिन भी दूर नहीं जब मौजूदा सरकार का कोई अस्तित्व ही नहीं बचेगा। महिला की आपबीती सुनकर, उसके मकान की हालत देखकर हरपाल कंबोज ने उसकी मदद करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जन चेतना फाऊंडेशन एनजीओ की टीम द्वारा सुबोध राधा की  हर संभव मदद की जाएगी। साथ ही मौजूदा सरकार पर प्रहार करते हुए कंबोज ने कहा कि वैसे तो सरकार महिला सुरक्षा और सम्मान की बात करती है परंतु सच्चाई यह है कि जरूरतमंद महिलाएं आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही हैं। 

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Web Title: No wall, no bath house roof, how good it is: Camboz

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