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फतेहाबाद : विस्थापित होने के 62 सालों के बाद भी भाखड़ा विस्थापित लोगों को अपने हकों को पाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यह बात भाखड़ा डैम औस्टीज एसोसिएशन के कार्यकारी प्रधान राजेंद्र ठाकुर ने कही। वो एसोसिएशन की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाखड़ा बांध के लिए उन लोगों की जमीन 1956 में एक्वायार की गई थी तथा उसके बदले में बिना किसी रणनीति के ही उनको इधर-उधर भेज दिया गया। यहां तक के विस्थापित करने से पूर्व उनकी अधिगृहित की गई जमीन की पैमाइश नहीं करवाई गई तथा न ही उसके बदले में उतनी जमीन दी गई। उस समय के अधिकारियों ने अधिकतम 25 एकड़ जमीन अलाट करने की बात कही गई तथा 4 मरले तक अलाट की गई। उन्होंने कहा कि उस समय हमारे यहां लोग साल में तीन फसले लेते थे जबकि यहां पर अलाट की गई जमीन बिरानी एरिया में अलाट की गई। इसके अलावा जिला के गांव अहलीसदर और सिरसा के गांव देसूजौधा में अभी तक अलाट नहीं की गई। जो जमीन अलाट की गई अधिकांश गांवों में उस जमीन पर लोगों द्वारा कब्जा किया हुआ है। जिस पर स्थानीय प्रशासन व सरकार ने कब्जा छुडवाकर नहीं दिया। 


ठाकुर ने कहा कि भाखड़ा बांध के लिए जो जमीन उन लोगों के द्वारा दी गई थी उसके बदले दी गई जमीन में भी 30 प्रतिशत की कटौती की गई जोकि सरासर हमारे साथ अन्याय किया गया। जब हम लोगों को विस्थापित किया गया था तो उस समय की मौजूदा सरकार ने अनेकों वायदे किए थे। अब तक कई सरकारें आई और गई लेकिन भाखड़ा विस्थापितों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किसी सरकार ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री से भी हम मिल चुके हैं लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन एसोसिएशन को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी। बैठक में एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार, सचिव रामस्वरुप शर्मा, कोषाध्यक्ष हजारी लाल शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य रणवीर सिंह, रमेश कुमार, कुलदीप सिंह, पूर्व प्रधान ठाकुर अजमेर सिंह, निरंजन सिंह, राजेश कुमार सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। 

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Web Title: Bhakra displaced for his rights: Rajendra Thakur

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