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अहमदाबादः 7 अक्टूबर 2001 का दिन प्रधानमंत्री मोदी की जिंदगी का सबसे अहम दिन था। इस दिन नरेंद्र मोदी एक आम कार्यकर्ता से सीधे मुख्यमंत्री बने थे। गुजरात की बागडोर नरेंद्र मोदी के हाथ सौंपी गई और आगे इसी रास्ते पर चलकर उनका प्रधानमंत्री बनने तक का सफर पूरा हुआ। उन्होंने कभी सोचा न था कि वह गुजरात के सीएम पद के लिए नियुक्त होंगे। साधारण से परिवार में जन्म लेने वाले और रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले मोदी एक दिन गुजरात के सीएम और बाद में देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे ये किसी ने सोचा नहीं था। खैर उनके जन्मदिन के मौके पर जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात की कमान संभाली थी उस वक्त की सारी दास्तान हम आपको बताते हैं।


गुजरात में भूकंप के बाद राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के खिलाफ असंतोष भड़कने लगा था। तब उनके स्थान पर नरेंद्र मोदी को बिठाया गया। 1996 में शंकर सिंह के खिलाफ बगावत के बाद गुजरात में मोदी के पुनरागमन की बात असंभव लगती थी। पांच साल में ही मोदी गुजरात के नाथ बनकर वापस आए। पार्टी में बगावत की धमकी देने वाले केशुभाई और मोदी के हाथ के नीचे काम करने से इंकार करने वाले सुरेश भाई मेहता तथा गुजरात भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राणा मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें चुनौती देने के लिए तैयार हो गए थे।

इस दौरान अपने भाषण में मोदी ने कहा- मैं खुशनसीब अर्जुन हूं कि मुझे दो-दो कृष्ण (केशुभाई-सुरेशभाई) मिले हैं। इससे उन्होंने दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने की एक छोटी सी कोशिश की। सभी को ऊपर से आदेश था कि मोदी का सहयोग करो। वल्लभ भाई कथिरिया, सूरत के दिग्गज नेता काशीराम राणा भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। सौराष्ट्र के केशुभाई का विकल्प माने जाने वाले तत्कालीन वित्त मंत्री वजू भाई वाला ने उनके लिए राजकोट 2 की सीट खाली कर दी। मोदी के लिए यह सेफ सीट थी। जहां से वे अपेक्षा से अधिक वोटों से विजय प्राप्त की।

शपथ ग्रहण समारोह में तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाण्डीस, गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह समेत कई नेता उपस्थित थे। समारोह में भाजपा के 50 हजार कार्यकर्ता भी उपस्थित थे। राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी ने मोदी को शपथ दिलाई। वर्ष 2002 के दिसम्बर में गुजरात में विधानसभा चुनाव हुए। 42 महीने कार्यभार संभालने के बाद केशुभाई ने केवल 18 महीने के लिए नरेंद्र मोदी को पदभार सौंपा था। सभी यही समझ रहे थे कि मोदी आगामी चुनाव नहीं जीत पाएंगे, लेकिन मोदी एक बार फिर गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए। इसके बाद मोदी कभी नहीं रुके। उन्होंने 2002 के बाद 2007 में भी गुजरात में विजय प्राप्त की और फिर 2012 के भी विधानसभा चुनाव जीते। यहीं नहीं 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ कर प्रचंड जीत के साथ देश के प्रधानमंत्री बने।

22 दिसम्बर 2002 को अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम में मोदी का भव्य शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी उपस्थित थे। इसके अलावा लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, जे. जयललिता, बाबूलाल मरांडी, ओमप्रकाश चौटाला, वेकैया नायडू भी उपस्थित थे। इसके बाद अमित शाह और सौरभ पटेल को पहली बार मंत्री बनाया गया। इस चुनाव में भाजपा को 182 में 127 सीटें मिली थी। कांग्रेस को 51 सीटें मिली थी। इसके बाद 2007 और 2012 में भी मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने विजय का परचम फहराया।

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Web Title: Birthday Special: When Narendra Modi became the Chief Minister for the first time, Gujarat was in such a situation

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