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1980 के दशक में जब मोदी गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए तो माना गया कि पार्टी को संघ के प्रभाव का सीधा फायदा होगा. वे वर्ष 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए. नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की. इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए. भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई में कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराया गया। यह अपने आप में ही बहुत बड़ी बात थी। कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने से पहले भारतीय तिरंगा झंडा फहराने की बात हमेशा होती थी, लेकिन ये काम हुआ 26 जनवरी 1992 को। इसके लिए दिसंबर 1991 में कन्याकुमारी से 'एकता यात्रा' की शुरुआत की गई थी, जो कई राज्यों से होते हुए कश्मीर पहुंची थी। मुरली मनोहर जोशी के साथ उस वक़्त नरेंद्र मोदी भी थे।

मुरली मनोहर जोशी इस यात्रा के बारे में बताते हैं कि सोच चार के बाद इसका नाम एकता यात्रा रखा गया क्योंकि कन्याकुमारी से कश्मीर तक यह देश को एक रखने के मक़सद से किया गया था। यह एक बड़ी यात्रा थी। यह लगभग सभी राज्यों के होकर गुज़री। मक़सद यह था कि तिरंगे को सम्मान मिले और कश्मीर को भारत से अलग नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस यात्रा को सभी समुदाय के लोगों ने समर्थन दिया. सभी ने सैंकड़ों-हज़ारों झंडे हमें दिए और वो चाहते थे कि हम उन्हें वहां फहराए।

जोशी ने कहा कि यात्रा सफल हो सके, इसका प्रबंधन नरेंद्र मोदी के हाथों में था। यात्रा लंबी थी, अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग प्रभारी थे और उनका कोऑर्डिनेशन नरेंद्र मोदी करते थे। यात्रा सुगमता से चलती रहे, लोगों और गाड़ियों का प्रवाह बना रहे, सबकुछ समय पर हो, यह सारा काम नरेंद्र मोदी ने बहुत कुशलता के साथ किया और जहां आवश्यकता होती थी, वहां वो भाषण भी देते थे। मोदी यात्रा के अभिन्न अंग के रूप में शुरू से आख़िर तक साथ रहे। बता दें कि आतंकवादियों के धमकी दिए जाने के बाद भी भाजपा नेताओं ने कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराया था।
 

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Web Title: Birthday Special: When Modi unfurled the tricolor at Lal Chowk in Kashmir

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