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मोदी ने 2001 में तब मुख्यमंत्री पद संभाला था जब उसी साल जनवरी में गुजरात में आए विनाशाकारी भूकंप के बाद केशुभाई पटेल को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। इस भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोग मार गए थे। मोदी के सत्ता संभालने के लगभग पांच महीने बाद ही गोधरा कांड हुआ। इस कांड ने पूरे देशभर को हिला कर रख दिया। 

कहा जाता है कि विश्व हिंदू परिषद के कारसेवक अयोध्या में राम जन्मभूमि के मुद्दे पर हुई बैठक में शामिल होकर वापिस अपने घर आ रहे थे। जब कारसेवकों की ट्रेन गोधरा के निकट पहुंची तो कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ट्रेन पर पेट्रोल आदि फेंक कर उन दो बोगियों को आग के हवाले कर दिया जिनमे कारसेवक मौजूद थे। इस घटना में 59 हिंदू मारे गए, जिनमे बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। देखते ही देखते पूरे गुजरात में दंगे भड़क गए। 

हिंदू और मुस्लमानों में हुए इस दंगे में 1200 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमे से अधिकतक मुस्लमान थे। मोदी उस समय गुजरात के पीएम थे। आज तक मोदी पर दंगों को रोकने के लिए उचित कदम न उठाने के आरोप लगते हैं। इसीलिए उन्हें अमरीका का वीजा नहीं मिला था और ब्रिटेन ने दस साल तक उनसे अपने रिश्ते तोड़े रखे। 

मोदी पर दंगों को न रोक पाने के आरोप लगे हैं जबकि उनकी सरकार में मंत्री रहीं माया कोडनानी इन्हीं कारणों से 28 साल की सजा भुगत रही हैं। आलोचक कहते हैं कि दंगों में भूमिका के कारण ही मोदी ने कोडनानी को मंत्री पद से नवाजा था। उस वक्त दंगों के कारण भारतीय जनता पार्टी पर मोदी को हटाने का दबाव था, लेकिन इसके चंद महीनों के बाद जब दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में मोदी ने जीत दर्ज की तो उन्हें सबसे ज्यादा फायदा उन इलाकों में हुआ जो दंगों से सबसे ज्यादा प्रभावित थे। वहीं 2007 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने गुजरात के विकास को मुद्दा बनाया था। मोदी 2007 और फिर 2012 में भी गुजरात में विधानसभा चुनाव जीते।

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Web Title: Birthday Special: USA and UK did not give visa to modi, surrounded by allegations of Godhra scandal

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