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नई दिल्लीः विदेश मंत्रालय ने आर.टी.आई. की एक धारा का उल्लेख करते हुए भगौड़े कारोबारी विजय माल्या और नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के बारे में ब्यौरा सांझा करने से इंकार कर दिया है। दरअसल, यह धारा उन सूचनाओं के खुलासे को प्रतिबंधित करती है जो अपराधियों के अभियोजन की प्रक्रिया को बाधित करती हो। सूचना का अधिकार (आर.टी.आई.) कानून के तहत दायर एक अर्जी के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि माल्या और नीरव के प्रत्यर्पण का अनुरोध ब्रिटिश सरकार को भेजा गया है। मंत्रालय ने पत्रकार की अर्जी के जवाब में कहा कि वे संबद्ध ब्रिटिश अधिकारियों के विचारार्थ हैं।

इस सिलसिले में हुए पत्राचार की प्रति आर.टी.आई. अधिनियम की धारा 8 (1) (एच) के तहत मुहैया नहीं की जा सकती। यह धारा उस सूचना का खुलासा किए जाने को प्रतिबंधित करती है, जो जांच प्रक्रिया या अपराधी के अभियोजन को बाधित करती हो। साथ ही, एक अन्य आर.टी.आई. अर्जी के जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले 4 सालों में विदेशी सरकारों को प्रत्यर्पण के 132 अनुरोध भेजे गए हैं। भगौड़ों का ब्यौरा मुहैया करने और विदेशी सरकारों के साथ किए गए पत्राचार की प्रति मांगे जाने पर मंत्रालय ने कहा कि आर.टी.आई. अधिनियम की धारा 8 (1) (एच) के तहत ब्यौरा मुहैया नहीं किया जा सकता।

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Web Title: Ministry of External Affairs refuses to share details of Mallya and Neerav extradition

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