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नई दिल्ली: देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को ‘अविश्वसनीय’ बताते हुए शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अप्रत्याशित सुनवाई की और कहा कि इसके पीछे एक बड़ी साजिश का हाथ है और वह इन आरोपों का खंडन करने के लिए भी इतना नीचे नहीं गिरेंगे। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप सुर्खियों में आने के बाद जल्दबाजी में की गई सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संयम बरतने और जिम्मेदारी से काम करने का मुद्दा मीडिया के विवेक पर छोड़ दिया ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं हो।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की विशेष पीठ ने करीब 30 मिनट तक इस मामले की सुनवाई की। शीर्ष अदालत की एक पूर्व कर्मचारी द्वारा प्रधान न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने की खबरें कुछ न्यूज पोर्टल पर प्रकाशित होने के बाद न्यायालय ने ‘असामान्य और अप्रत्याशित’ तरीके से इसकी सुनवाई की। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता और मीडिया को सच्चाई का पता लगाए बिना इस महिला की शिकायत का प्रकाशन नहीं करना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब उनकी अध्यक्षता वाली पीठ को अगले सप्ताह ‘अनेक संवेदनशील मामलों की सुनवाई करनी है और यह देश में लोकसभा चुनावों का महीना भी है।’पीठ ने इस विवाद के पीछे किसी बड़ी ताकत का हाथ होने का इशारा किया जो न्यायिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को डगमगाने में सक्षम है। यद्यपि इस पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश कर रहे थे लेकिन उन्होंने न्यायिक आदेश पारित करने का काम जस्टिस मिश्रा पर छोड़ दिया था।

जस्टिस मिश्रा ने आदेश लिखाते हुए कहा कि मामले पर विचार करने के बाद हम फिलहाल कोई भी न्यायिक आदेश पारित करने से गुरेज कर रहे हैं और इसे संयम बरतने तथा जिम्मेदारी से काम करने के लिए मीडिया के विवेक पर छोड रहे हैं जैसा उससे अपेक्षा है और तदनुसार ही निर्णय करे कि उसे क्या प्रकाशित करना है क्या नहीं करना है क्योंकि ये अनर्गल आरोप न्यायपालिका की गरिमा को अपूर्णनीय क्षति पहुंचाते हैं और इसकी स्वतंत्रता को नकारते हैं। आदेश मे कहा गया कि इसलिए हम इस समय हम अनावश्यक सामग्री को अलग करने का काम मीडिया पर छोड़ रहे हैं। 

बार काऊंसिल आफ इंडिया ने की निंदा : 

नई दिल्ली बार काऊंसिल ऑफ इंडिया (बी.सी.आई.) ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोईृ के खिलाफ यौन उत्पीड़न के ‘गढ़े और झूठे’ आरोपों की निंदा की और कहा कि बार काऊंसिल उनके साथ और ‘संस्थान की छवि धूमिल करने’ के इस प्रयास के खिलाफ खड़ा है। बी.सी.आई. अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा, ‘यह सब झूठा और गढ़ा हुआ आरोप है और हम इस तरह के कृत्यों की निंदा करते हैं। ऐसे आरोपों और कृत्यों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। यह संस्थान की छवि धूमिल करने का प्रयास है। पूरा बार भारत के प्रधान न्यायाधीश के साथ खड़ा है।’ उन्होंने कहा कि रविवार को शीर्ष बार इकाई की एक आपातकालीन बैठक आहूत की जाएगी और इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
 

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Web Title: Charges of sexual assault on judge Ranjan Gogoi

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