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एक साथ कई काम करने के चक्कर में आप अवसाद से न घिरे इसलिए इन बातों को जिंदगी में जरूर अपनाइए:

जो कुछ भी आप के चारों ओर घट रहा है, उस के प्रति अपनी प्रतिक्रि या अवश्य व्यक्त करें। सब कुछ चुपचाप रोबोट की तरह न स्वीकारें। परिवर्तन की प्रक्रि या से उत्पन्न अपनी भावनाओं को स्वीकार करें। याद रखें, आप की भावनाओं को आप से बेहतर और कोई नहीं जान सकता। क्षमता से अधिक काम न करें: घर हो या दफ्तर, अच्छा बनने के चक्कर में न पड़ें। याद रखें, यदि आप अपनी क्षमता से बढ़ कर काम करेंगी तो आप को कोई मैडल तो मिलेगा नहीं, बल्कि लोगों की अपेक्षाएं और बढ़ जाएंगी। दूसरे-गलतियों का खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा। आज का जमाना टीम वर्क का है। इससे दूसरे के बारे में जानने या समझने में तो मदद मिलती ही है, थकान व तनाव से भी राहत मिलती है। घर के काम में भी घर वालों की मदद लें।

पॉजिटिव सोच
गलतियों के लिए आप जिम्मेदार हैं, इस भावना को दिल से निकाल दें। इसी तरह दफ्तर में कोई प्रोजैक्ट हाथ से निकल गया हो, तो ‘‘यह काम तो मैं कर ही नहीं सकती’’ या ‘‘मैं इस काम के लायक ही नहीं हूं’’ जैसे नकारात्मक विचार दिमाग में न आने दें।

बनिए निडर
कई बार माता-पिता से मिले व्यवहार की जड़ें इतनी गहरी हो जाती हैं कि वयस्क होने पर भी उन से छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है। कुछ महिलाएं असंतुष्ट रिश्तों को सारी उम्र इसलिए बनाए रखती है, क्योंकि वे डरती हैं कि इन रिश्तों को तोड़ने से समाज में बदनामी होगी। लेकिन सच तो यह है कि आज के इस मशीनी युग में लोगों को इतनी फुरसत ही कहां है, जो दूसरों के बारे में सोचें। सभी अपनी दुनिया में जी रहे हैं। इसी तरह यदि दफ्तर में भी अपने बॉस से तालमेल न बैठा पा रही हों, तो तबादला दूसरे विभाग में करा लें।

कुदरत से जुड़ें
सुबह सूर्योदय से पहले उठें तथा घूमने जाएं। घूमने के लिए वे स्थान चुनें जहां हरियाली हो। नदी,तालाब, झरने, समुद्र,बाग-बगीचों में घूमने से मन मस्तिष्क को राहत महसूस होगी।

समाधान ढूंढें
कितनी भी परेशानी हो उसे सहजता से लें। हड़बड़ी से परेशानी और बढ़ जाती है। धैर्य रख कर प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करें। उन पहलुओं पर विचार करें, जिनसे आपकी समस्या का समाधान मिल सकता है।

दिनचर्या बदलें
रोज आप एक ही काम कर के थक गई हैं, ऑफिस में भी बोरियत महसूस कर रही हैं, तो कुछ दिन बाहर घूमने जाएं या परिवार समेत पिकनिक पर जाएं। स्पा लें, पार्लर जाएं। कभी-कभी छोटा सा ‘गैट-टु-गैदर’ भी मन को राहत देता है।

अच्छी श्रोता बनें
यदि आप दूसरों की बात से सहमत नहीं हैं, तो भी बिना निर्णय लिए दूसरों की बात सुनें। वह क्या कह रहा है, उसे समझने की कोशिश करें और उसे एहसास दिलाएं कि आप उस की बात ध्यान से सुन रही हैं।

फिट रहें
स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें। अपना रूटीन चेकअप करते रहने से आप कई समस्याओं से बची रहेंगी। अंत में सारे काम किए जा सकते हैं, लेकिन सारे काम एक बार में नहीं किए जा सकते। स्त्री परिवार की केंद्र भी है और परिधि भी। उसे मां, पत्नी और वर्किग वूमैन बनने की जरूरत है, सुपर वूमैन बनने की नहीं।

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Web Title: By following these tips women can become successful housewife

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