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गुवाहाटी के गोरचुक इलाके का मॉडल स्कूल जहां फीस के बदले प्लास्टिक कचरा लिया जाता है। इसकी सराहना करते हुए वर्ल्ड इकॉनोमिक फॉरम ने भी ट्वीट किया है जिसको रीट्वीट करते हुए नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने भी सराहना की है।

असल में असम के गुवाहाटी में एक दंपत्ति ने एक ऐसा स्कूल खोला है जिसमें पढ़ने वाले छात्रों से फीस ना लेकर प्लास्टिक कचरा लिया जाता है। यहां पढ़ने वाले छात्र हर हफ्ते प्लास्टिक की 25 चीजें स्कूल में लाकर जमा कर देते हैं। स्कूल इस कचरे को रीसाइक्सिंग करने के लिए भेज देता है जहां ईको फ्रेंडली ईंटें बनाई जाती हैं जिनसे स्कूल कैंपस बनाया जाता है।

इस स्कूल की स्थापना माजिन मुख्तार और उनकी पत्नी प्रतिमा शर्मा ने किया है। माजिम पहले न्यूयॉर्क में थे जहां से वह भारत वापस आए। उनका सपना था कि वह यहां एक स्कूल खोलें। माजिम ने भारत आकर इसपर काम करना शुरू कर दिया।

भारत में ही टाटा इंस्टीट्यूट सोशल साइंस की छात्रा प्रतिमा से उनकी मुलाकात हुई और दोनों में प्यार हो गया जिसके बाद उन्होंने शादी कर ली।

2016 में दंपत्ति ने स्कूल की स्थापना की जिसमें बच्चे फीस के बदले प्लास्टिक कचरा देते हैं। इससे ना सिर्फ गरीब बच्चों को पढ़ने का मौका मिल रहा है बल्कि प्रदूषण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।

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Web Title: this school accepts plastic waste instead of fee

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