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दिसंबर, 2008 में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने के आदेश में कहा गया था कि किसी व्यक्ति के खिलाफ अगर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लापरवाही और तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने का केस दर्ज हुआ है तो उसके खिलाफ आईपीसी के तहत केस नहीं चलाया जा सकता है।

अपराध और सजा अलग-अलग हैं
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, 'दोनों कानूनों के तहत अपराध और सजा अलग-अलग हैं। दोनों के तहत अपराधी पर मुकदमा चलाया जा सकता है और एक-दूसरे से स्वतंत्र होकर दंडित किया जा सकता है। हमारी राय में आईपीसी और मोटर व्हीकल कानून के प्रावधानों में कोई विरोधाभास नहीं।

अधिकारियों को निर्देश जारी
यहां बता दें कि हाई कोर्ट ने, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, असम, और नगालैंड को अपने अधिकारियों को निर्देश जारी करने को कहा था कि वो मोटर व्हीकल दुर्घटनाओं से जुड़े अपराधों के लिए मोटर व्हीकल कानून के तहत मुकदमा चलाएं, न कि आईपीसी के तहत।

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Web Title: if you drive carelessly than case will be filed

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