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जिमीकंद एक गुणकारी सब्जी है। यह पचने में बेहद हलका, कफ एवं वात शामक, रुचिवर्धक, शूलहर, मासिक धर्म बढ़ानेवाला व बलवर्धक है। सफेद सूरन अरुचि, मंदाग्नि, कब्ज, पेटदर्द, वायुगोला, आमवात तथा यकृत व प्लीहा के मरीजों के लिए एवं कृमि, खांसी व श्वांस की तकलीफ वालों के लिए उपयोगी है। सूरन पोषक रसों के अवशोषण में मदद करके शरीर में शक्ति उत्पन्न करता है। बेचैनी, अपच, गैस, खट्टी डकारें, हाथ-पैरों में दर्द आदि में तथा शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के लिए बहुत ही लाभदायी है। सूरन की लाल व सफेद इन दो प्रजातियों में से सफेद प्रजाति का उपयोग सब्जी के रूप में विशेष तौर पर किया जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार जिमीकंद उन लोगों को नहीं खाना चाहिए, जिनको किसी भी प्रकार का चर्म रोग हो। जिमीकंद ड्राई, कसैला, खुजली करने वाला होता है। गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। पेट से जुड़े रोगों के लिए इसका सेवन रामबाण की तरह होता है। यह दिमाग तेज करने में भी मदद करता है। जिमीकंद खाने से मेमोरी पावर बढ़ती है। साथ ही यह अल्जाइमर रोग होने से भी बचाता है।

जिमीकंद में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन पाया जाता है। यह कैंसर पैदा करने वाले फ्री रैडिकल्स से लड़ने में सहायक होता है। एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों के कारण यह गठिया और अस्थमा रोगियों के लिए अच्छा होता है। जिमीकंद में पाया जाने वाला कॉपर लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में ब्लड के फ्लो को दुरुस्त करता है और आयरन ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करने में मदद भी करता है।

जिमीकंद का प्रयोग बवासीर, सांस रोग, खांसी, आमवात और कृमिरोगों के उपचार में किया जाता है। जिन लोगों को लीवर या यकृत में समस्या है, उनके लिए भी जिमीकंद एक वरदान है।

जिमीकंद में बी6 होने से दिल की बीमारी नहीं होती। जिमीकंद में विटामिन बी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह बल्ड प्रेशर को नियंत्रित करता है।

जिमीकंद में पोटैशियम की मौजूदगी के कारण यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करता है। इसे नियमित खाने से कब्ज और कॉलेस्ट्रॉल की समस्या दूर हो जाती है।


 

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Web Title: health benefits of Elephant Foot Yam

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