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आप सभी ने यह अवश्य देखा होगा कि मिठाइयों के ऊपर चांदी की वर्क की परत होती है। जो खासतौर पर दिवाली और होली के अलावा बाकी दिनों में भी मिठाइयों के ऊपर दिखाई देती हैं। अगर पान में भी चांदी का वर्क लगा हो तो उसकी कीमत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

लेकिन आप क्या जानते है कि चांदी के वर्क को बनाने में जानवरों की आंत का उपयोग भी होता है। हालांकि Food Safety And Standard Authority Of India (FSSAI) ने चांदी के ऐसे वर्क पर रोक भी लगा रखी है। जिसके कारण आपको आगे बताने जा रहे है... 


1. इस वर्क में जानवरों की खालों और आंतों का उपयोग किया जाता है। लगभग 90 फीसदी चांदी का वर्क विकुल ऐसे ही बनता है।

2. वर्क बनाने के लिए चांदी को जानवरों की आंतों के बीच पीटा जाता है। इससे बिल्कुल पतले वर्क बनते हैं और इन्हें सामान पर लपटने में बहुत आसानी हो जाती है।

3. चांदी के वर्क की शीट और पैकेट पर सिंबल या वॉर्रिंग भी नही होती, जिससे पता लगाया जा सके कि वह वेजिटेरियन प्रोडक्ट है या नॉन-वेजिटेरियन।

4. चांदी के वर्क में भारी पदार्थ जैसे निकल, लेड, क्रोमियम और कैडमियम भी होते हैं। ये भी मेटल सेहत के लिए बहुत खतरनाक होते हैं।

5. मिठाई, पान और सुपारी ही नही, बल्कि सेब को भी बहुत ज्यादा बेहतर दिखाने के लिए चांदी का वर्क लगाया जाता है।

6. चांदी का वर्क बनाने के लिए कई जगह मशीनों का भी उपयोग होने लगा है। इसमें स्पेशल पेपर और पॉलिएस्टर कोटेड शीट के बीच चांदी को रखकर ही वर्क बनाया जाता है।
 
7. ऐसे करे चेक: चांदी के वर्क को हाथ में लेकर मसलें। यदि ये गोली बन जाए तो चांदी का कोई वर्क ही नही है।

8. चांदी का वर्क जलाने पर उतने की वजन की छोटी सी गेंद के रूप में तब्दील हो जाती है। अगर इसमें एल्युमिनियम मिलावट है तो इसको जलाने पर ग्रे रंग का अवशेष ही बचता है।
 

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Web Title: Is it safe to eat sweets coated with silver foil

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