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दुनिया भर में 10 में से 9 लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशांसित सुरक्षित स्तरों से अधिक प्रदूषित हवा में सांस लेने के लिए मजबूर हैं। दुनिया भर में हर साल लगभग 70 लाख लोग वायु प्रदूषण के कारण अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। सर्दियों और गर्मियों के प्रदूषण में अंतर होता है। गर्मियों में हवा में धूल की मात्र बढ़ जाने से खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि गाड़ियों से निकलने वाले अन्य प्रदूषण से धूल के कण चिपक जाते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

ऐसी स्थिति में गर्मी के साथ-साथ वातावरण में मौजूद सूखेपन से दिक्कत और बढ़ जाती है। इस मौसम में धूल के कण दूसरे प्रदूषित कणों के साथ मिलकर वाहक का काम करते हैं, जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित सांस के मरीज होते हैं। धूल, प्रदूषण, तेज गर्मी, सूखेपन सहित कुछ कारणों के सक्रि य हो जाने से ये चीजें उनके मर्ज के लिए ट्रिगर का काम करती हैं। श्वास संबंधी रोगियों को इस दौरान ज्यादा दिक्कत इसलिए भी होती है, क्योंकि जैसे-जैसे वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ता है, उससे फैफड़ों के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं।

बरतें ये सावधानियां
* प्रदूषण का स्तर खतरनाक से बेहद खतरनाक (350 से 450) की तरफ जाता दिखे, तो कुछ समय के लिए जगह बदल लें।
* ऐसी किसी जगह जाएं, जहां प्रदूषण का स्तर 150 या इससे कम हो। 
* एन 95 मास्क पहनें। अगर इससे सांस घुटती है, तो पूरे दिन सामान्य मास्क लगाएं या गीला रूमाल मुंह पर बांधें। 
* इन्फ्लूएंजा का वैक्सीन लगवाने का ध्यान रखें, ताकि आपकी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रहे।
* गले में खराश महसूस होने पर स्टीम लें और गरारे करें। 
* पानी के साथ-साथ अन्य शीतल पेय जैसे, लस्सी, छाछ, शिकंजी, शर्बत आदि का भी सेवन करते रहें। 

एयर प्यूरीफायर की भूमिका 
विभिन्न शोध बताते हैं कि घर के अंदर की हवा बाहर की हवा से लगभग चार से पांच गुना तक ज्यादा खतरनाक हो सकती है। इसलिए आजकल एयर प्यूरीफायर काफी चलन में आ गए हैं। इसका फिल्टर कमरे की हवा में मौजूद धूल के कणों, बाल आदि को खत्म कर हवा को साफ करता है। आपको अपने कमरे के आकार के हिसाब से ही प्यूरीफायर खरीदना चाहिए, क्योंकि हर प्यूरीफायर की क्षमता अलग-अलग होती है। इसके लिए कंपनी की डैमो सुविधा का लाभ लें।

इनकी होती है अहम भूमिका

भाप : जरूरत पड़ने पर भाप हमेशा किसी ऐसे बर्तन से लें, जिससे वह सीधा आपकी नाक में जाए और गले एवं छाती को भी सेंक मिले। नाक से लंबी सांस खींच कर मुंह से निकालें।

मास्क : बाजार में और ऑनलाइन आजकल सर्जिकल मास्क, एन-सीरीज मास्क और आर-सीरीज मास्क बहुत आसानी से मिल जाते हैं। कुछ मास्क ऐसे होते हैं, जिनमें अलग-अलग कपड़े की तीन परतें होती हैं। 

ऑक्सीजन थैरेपी : सांस की गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को यह थैरेपी दी जाती है। कई बार आपातकालीन स्थिति में यह बचाव का काम करती है। जब व्यक्ति खुद से सांस नहीं ले पाता तो इस थैरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।

पल्स ऑक्सीमीटर : इस यंत्र से सैचुरेशन (शरीर में ऑक्सीजन की मात्र) को मापा जाता है। स्वस्थ इंसान के शरीर का सैचुरेशन 96 से 99 फीसदी के बीच रहता है।

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Web Title: Even if you are healthy, stay away from pollution, these are preventive measures

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