image

एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज’ से कई जाने-माने एथलीट्स, मैथ क्लब जीनियस, प्रतिभाशाली म्यूजिशियन्स और अन्य विलक्षण प्रतिभा के धनी स्टूडैंट्स का ख्याल हमारे मन में आता है। लेकिन क्या यही सब एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज होती हैं? बेशक नहीं, इसमें में स्पोर्ट्स टीम्स और जीनियस स्टूडैंट्स के क्लब्स से कहीं ज्यादा कारक शामिल होते हैं। एक्स्ट्रा-करिकुलर का अर्थ ऐसी एक्टिविटीज और अन्य कार्यों में हिस्सा लेना है जो आपके अकैडेमिक करिकुलम में शामिल नहीं होते हैं।आपका कालेज वह स्थान है जो आपके भविष्य और करियर की नींव रखता है। यह वह स्थान है जहां सिर्फ आपको किताबी ज्ञान ही नहीं मिलता बल्कि जहां आपकी पर्सनैलिटी या व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास होता है। असल में एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज से ही आपके व्यक्तित्व का पूर्ण विकास संभव हो पाता है। 

अगर आप अपने कालेज में कुछ नई एक्टिविटीज को शुरू करने के लिए एक्स्ट्रा-मोटिवेशन की तलाश कर रहे हैं तो यहां एक छोटा सा उदाहरण पेश है। आजकल एम्प्लॉयर्स ऐसे लोगों की तलाश में रहते हैं जिन्हें पढ़ाई के अलावा भी और बहुत कुछ करना आता है। वे ऐसे कैंडिडेट्स की तलाश में रहते हैं जो दूसरे लोगों के साथ इंटरेक्शन और संपर्क करने में कुशल हों। टैक्निकल स्किल्स सिखाए जा सकते हैं लेकिन कालेज में एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज की मदद से विकसित होने वाले सॉफ्ट स्किल्स आपको ऑफिस में नहीं सिखाए जा सकते हैं। कालेज स्टूडैंट्स को एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज से मिलने वाले फायदे

शौक और जोश का लगता है पता : एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज स्टूडैंट्स को उनके मानक अकैडमिक करिकुलम के अतिरिक्त अपने लक्ष्य प्राप्त करने और शौक पूरे करने की इजाजत देती है। उदाहरण के लिए, कोई बिज़नैस एडमिनिस्ट्रेशन का स्टूडैंट म्यूजिक का शौक रखता हो और अपने इस शौक को पूरा करने के लिए वह आसानी से कालेज बैंड ज्वाइन कर सकता है। वह कुछ दूसरी एक्टिविटीज में भी भाग ले सकता है जैसे कि वह किसी लैंग्वेज क्लब को ज्वाइन कर सकता हैं। किसी विदेशी भाषा को सीखने से उसके रिज्यूम में बहुत सकारात्मक असर पड़ेगा।?बिज़नैस एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री और किसी विदेशी भाषा की अच्छी जानकारी जॉब इंटरव्यू के समय उसे अपने सहकर्मी से ज्यादा योग्य बना सकते हैं। एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज स्टूडैंट्स को उनके कौशल विकास में मदद करती हैं जिससे बाद में उन्हें अपनी प्रोफैशनल लाइफ सैट करने में काफी मदद मिलती है।

दूसरों के साथ मिलकर काम करने की क्षमता का होता है विकास: एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज अक्सर ग्रुप एक्टिविटीज होती हैं जो आप अपने जैसे शौक या पसंद रखने वाले लोगों के साथ मिल-जुलकर संपन्न करते हैं। चाहे वह फुटबॉल, क्रि केट जैसी कोई स्पोर्ट्स टीम हों या फिर बैडमिंटन, तैराकी जैसा अकेले खेले जाने वाला कोई खेल हो। टीम्स में खेली जाने वाली कई अन्य गेम्स की तरह ही तैराकी जैसे स्पोर्ट्स में भी आपको टीम के साथ प्रैक्टिस करनी होती है। तैराकी में भी अन्य कई साथी तैराक होते हैं जिनसे प्रतियोगिता करके आप अपने स्किल्स और ज्यादा बढ़ाते जाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज केवल आपके टैक्निकल स्किल्स के विकास से ही संबद्ध नहीं होती हैं, इनसे आपके कम्यूनिकेशन स्किल्स भी निखरते हैं। टीम-स्पिरिट, दूसरों के साथ मिलकर काम करना, पब्लिक स्पीकिंग और अन्य कई ऐसे सॉफ्ट स्किल्स एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज से निखरते है।. एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज आपको बहुत से लोगों से इंटरेक्ट करने और संपर्क कायम करने का मौका देती हैं जिनमें से कुछ आपकी बाद की जिंदगी में बहुत काम आ सकते हैं।

समय का सदुपयोग : जो स्टूडैंट्स एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज में शामिल रहते हैं, वे अपने समय का उपयोग उन स्टूडैंट्स से कहीं बेहतर तरीके से करते हैं जो स्टूडैंट्स हमेशा अपनी किताबों में खोए रहते हैं। हरेक दिन दो-तीन अलग-अलग टास्क्स पर काम करने से स्टूडैंट्स कई अलग-अलग टास्क्स को प्राथमिकता देने की कला सहज ही सीख जाते हैं। मान लीजिए, कोई स्टूडैंट थिएटर या ड्रामैटिक्स सोसायटी में शामिल होता है, उसे एक्टिंग की प्रैक्टिस के लिए भी समय निकालना है और इसके साथ ही अपने कोर्स वर्क तथा प्रोजैक्ट सबमिशन में भी वह व्यस्त रहता है। वह यह भलीभांति जानता है कि वह दोनों में से किसी काम को भी नहीं छोड़ सकता है और इसलिए वह अपने इन दोनों ही कामों को अच्छी तरह पूरा करने के लिए कोई न कोई तरीका ढूंढ लेता है। ऐसा स्टूडैंट अपने लिए एक वर्क शैड्यूल बनाता है और पूरी ईमानदारी से उसका पालन करने की कोशिश करता है। वह शायद ही अपने किसी काम को कल पर टाले या अपना समय बेकार की बातों में बरबाद करे। इसके अतिरिक्त, कुछ घंटे प्रैक्टिस कर लेने पर वह अपने को ज्यादा तरोताज़ा महसूस करता है और फिर निश्चिंत होकर अपनी पढ़ाई कर सकता है।

रिज्यूम और पोर्टफोलियो बिल्डर
जैसे कि हमने पहले भी कहा है, कालेज स्टूडैंट्स के लिए किसी जॉब या इंटर्नशिप के इंटरव्यू के समय एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज में भाग लेना बहुत फायदेमंद रहता है। यदि किसी स्टूडैंट के पास काफी प्रोफैशनल अनुभव नहीं है तो एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज किसी स्टूडैंट के पोर्टफोलियो में बहुत जबरदस्त असर डालती हैं। अक्सर अधिकांश कालेज स्टूडैंट्स अपने कालेज के तीन साल पूरे होने से पहले कभी किसी प्रोफैशनल अनुभव को प्राप्त करने या इंटर्नशिप्स करने के बारे में नहीं सोचते हैं। एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज कालेज के दौरान सीख गए स्किल्स और अनुभव पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के समुचित जवाब देने में किसी भी स्टूडैंट की मदद करती हैं। एम्प्लॉयर को कैंडिडेट के प्रोफाइल को अच्छी तरह समझने में इससे काफी मदद मिलती है।

DainikSavera APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS

Web Title: Extra curricular activity is essential for good careers

More News From career

free stats