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संग्रहालयों या गैलरी में लगने वाली प्रदर्शनियों के लिए लेआऊट डिजाइन तैयार करना, प्लानिंग करना और चीजों को सुव्यवस्थित करना एग्जिबिशन डिजाइनर का काम होता है। इनका काम प्रदर्शनी के पहले प्लानिंग करना, बजट बनाना, विभिन्न टीमों के साथ कोऑर्डिनेट करना और प्रदर्शनी के लिए निर्माण करवाना व साज-सज्जा करना होता है। इन्हें विभिन्न प्रदर्शनियों, मेलों और एक्सपो जैसे कार्यक्रमों के आयोजन की जिम्मेदारी लेनी पड़ती है। उन्हें यह समझना होता है कि उक्त प्रदर्शनी किस प्रकार के लोगों के लिए लगाई जा रही है। उनकी सोच को समझते हुए उन्हें अपने कार्य को अंजाम देना होता है।

साथ ही अपने क्लाइंट के विचारों को समझकर उन्हें आगंतुकों तक बेहतरीन तरीके से पेश करना होता है। प्रदर्शनी के लिए बजट और समय का भी इन्हें ख्याल रखना पड़ता है। संग्रहालयों में क्यूरेटर से बात कर विभिन्न वस्तुओं की अहमियत को समझना पड़ता है और उस वस्तु को वैसे ही प्रदर्शित करना पड़ता है। सबकी जरूरतों को समझने के बाद एग्जिबिशन डिजाइनर कम्प्यूटर की मदद से ड्रॉइंग व स्केल मॉडल का प्रयोग करके डिजाइन तैयार करता है। इसके बाद क्लाइंट से डिजाइन फाइनल हो जाने के बाद इसे साकार करने के लिए पूरी टीम मिलकर काम करती है। कभी-कभी प्रदर्शनियां दूसरे राज्यों या विदेशों में भी आयोजित की जाती हैं। ऐसे में वहां के लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए काम करना होता है।

योग्यता
12वीं करने के बाद इंडस्ट्रीयल डिजाइन, आर्किटैक्चर, ड्राफ्टिंग, स्पैशल डिजाइन, इवैंट मैनेजमैंट, इंटीरियर डिजाइन, 3डी डिजाइन या ग्राफिक डिजाइन में सर्टीफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री कोर्स करने के बाद इस क्षेत्र में कदम रखा जा सकता है। वहीं कुछ इंस्टीट्यूट ऐसे भी हैं, जो एग्जिबिशन डिजाइनिंग में स्पैशलाइजेशन कोर्स भी कराते हैं।

ये स्किल हैं जरूरी
अगर आप चाहते हैं कि इस क्षेत्र में सफलता आपके कदम चूमे तो इसके लिए आपके भीतर बेहतर डिजाइन व कलात्मक कौशल होना चाहिए। इसके अतिरिक्त आपके सोचने की क्षमता भी रचनात्मक हो, ताकि आप एग्जिबिशन की थीम को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकें। आपकी सोचने की शक्ति आपकी सफलता की चाबी है। इन सबसे अलग आपको हमेशा कुछ न कुछ नया सोचते रहना चाहिए। इसके लिए आपको देश दुनिया में हो रही गतिविधियों के बारे में पता होना चाहिए, ताकि आप कुछ नए थीम का इस्तेमाल करके अपनी प्रदर्शनी को सबसे अलग बना सकें। वहीं टैक्निकल ड्रॉइंग स्किल व डिजाइन सॉफ्टवेयर में अनुभव आपके काम को आसान बनाता है। चूंकि हर एग्जिबिशन की एक निश्चित तारीख होती है, इसलिए यहां सफल होने के लिए आपको डैडलाइन पर भी काम करना पड़ता है। वैसे तो यह काम सुबह 9 से शाम 5 बजे तक की नौकरी की तरह ही होता है, लेकिन फिर भी आपको क्लाइंट की जरूरत के हिसाब से नियत समय पर बेहतरीन आइडिया के बारे में सोचना व अपनी सोच को सकारात्मक रूप देना होता है। एग्जिबिशन को डिजाइन करना किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं है, इसमें पूरी टीम को मिलकर कार्य करना होता है। इसलिए आपमें टीम के साथ काम करने की क्षमता और प्रोजैक्ट मैनेजमैंट स्किल भी होनी चाहिए। इस सबसे अधिक आप में कम्यूनिकेशन स्किल का बेहतर होना बेहद आवश्यक है। आप अपने इसी कौशल के चलते न सिर्फ क्लाइंट को संतुष्ट कर पाएंगे, बल्कि प्रदर्शनी के दौरान आने वाले व्यक्तियों का भी अच्छी तरह स्वागत कर पाएंगे। 

नौकरी की संभावनाएं और सैलरी
एग्जिबिशन डिजाइनर को स्थाई या अस्थाई तौर पर कई तरह के संस्थानों में नौकरी मिल सकती है। इसमें आर्ट गैलरी, म्यूजियम, ऐतिहासिक स्थल, साइंस सैंटर, रिटेलर, इंटरप्रेटिव सैंटर, चिड़ियाघर, थिएटर या टी.वी. प्रोडक्शन कंपनी, आर्किटैक्चरल डिजाइन फर्म, अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियां या इवैंट कंपनियां, ट्रेड शो एंड कन्वैंशन, पार्क, जंगल, म्यूजियम आदि की जिम्मेदारी संभालने वाली सरकारी एजैंसियां शामिल हैं। 
शुरु आती दौर में एक एग्जिबिशन डिजाइनर दस हजार से पंद्रह हजार रु पए प्रतिमाह आसानी से कमा सकता है। वहीं थोड़े अनुभव के बाद आपकी सैलरी में वृद्धि होती जाती है। अनुभव प्राप्त करने के बाद जब आप डिजाइन मैनेजर के पद पर पहुंच जाएंगे तो आपकी सैलरी 75 हजार रुपए प्रतिमाह तक जा सकती है। अगर आप कॉन्टैक्ट पर काम करते हैं तो आपकी आमदनी आपको मिलने वाले कार्य पर निर्भर करती है।

जिम्मेदारियां
* प्रदर्शित की जाने वाली वस्तुओं को प्रदर्शनी स्थल तक पहुंचाना और उन्हें स्थापित करना।
* विभिन्न प्रकार के सप्लायर से संपर्क करना और बातचीत करना।
* क्लाइंट के साथ काम करना और उनके थीम आइडिया व जरूरतों को समझना। वस्तुओं के बारे में पूरी जानकारी लेना।
* क्लाइंट के आइडिया पर डिजाइन टीम के साथ विचार-विमर्श करना।
* क्लाइंट के प्रस्ताव और कोट तैयार करना। डिजाइनिंग प्रक्रिया के दौरान क्लाइंट से बेहतर तरीके से संवाद करना।

विशेषज्ञ की सलाह
इस क्षेत्र में आपको लगातार अपने क्लाइंट और अपनी पूरी टीम के साथ संवाद करते रहना पड़ता है, इसलिए आपका संवाद कौशल अच्छा होने के साथ ही आपको सेल्स की भी थोड़ी जानकारी होनी चाहिए। इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को अच्छी बातचीत करना आना चाहिए। इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। यहां आपकी शुरु आती कमाई बहुत ज्यादा नहीं होगी, लेकिन जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़ता जाएगा और क्लाइंट व कंपनियां आपके काम को पहचानने लगेंगी, आपकी कमाई भी बढ़ेगी। 

बीडीईएस इन एग्जिबिशन डिजाइन
इसके अंतर्गत कई विषय हैं : कलर थैरेपी, डिजाइन टैक्नोलॉजी, ड्रॉइंग (टैक्निकल), डिजाइन प्रैक्टिस, डिजाइन थ्योरी, कम्यूनिकेशन स्किल, मॉडल मेकिंग, मैटीरियल परचेज

डिप्लोमा इन एग्जिबिशन डिजाइन
इसके अंतर्गत कई विषय पढ़ाए जाते हैं: डिजाइन थिंकिंग, फैशन हिस्ट्री, फैशन साइकोलॉजी, ग्राफिक डिजाइन, फोटोग्राफी, विजुअल मर्केडाइजिंग, पैकेजिंग डिजाइन, फैशन स्टाइलिंग, फैशन कंज्यूमर बिहेवियर।

एडवांस डिप्लोमा इन इवैंट एंड एग्जिबिशन डिजाइन
इसके अंतर्गत कई विषय पढ़ाए जाते हैं: इवैंट डिजाइन, द वर्ल्ड?ऑफ इवैंट डिजाइन, कलर कोड एंड पैलेट टैक्नीक, इवैंट स्टाइल, साइट सिलैक्शन, सॉफ्टवेयर ऑटो कैड 2डी, डिजाइन एलिमैंट, लाइटनिंग, एग्जिबिशन डिजाइन, कॉस्टिंग एंड बजटिंग।

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Web Title: Career in Exhibition designer

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