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 संयुक्त राष्ट्र संघ में मिली खबर के मुताबिक चीन ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र नियमित बजट में 12 प्रतिशत का अपना भाग भुगतान किया है। महासचिव के प्रवक्ता ने इस पर चीन का आभार प्रकट किया। उधर अमेरिका ने इस वर्ष की 1 जनवरी तक अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र बजट में अपने 38.1 करोड़ अमेरिकी डालर का बकाया नहीं दिया है, और शांति मिशन के खर्च में 77.6 करोड़ डॉलर का बकाया देना बाकि है। अमेरिका का बकाया संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के कुल बजट में एक तिहाई भाग है।

   अमेरिका का अर्थतंत्र 200 खरब अमेरिकी डालर तक बड़ा है, जो विश्व अर्थतंत्र में 24 प्रतिशत भाग बनता है। अमेरिका में प्रति व्यक्ति के लिए आय 60 हजार अमेरिकी डालर तक रही है। इसी अनुपात से अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र संघ के नियमित बजट का 22 प्रतिशत भाग और शांति मिशन का 28 प्रतिशत भाग भुगतान करना होता है। लेकिन अमेरिका ने लंबे समय तक अपना बकाया नहीं दिया और अपने सदस्यता शुल्क की कटौती करने की मांग की। इसके पीछे यह जाहिर है कि अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रति अभिमानी और उपेक्षा की भावना मौजूद है।  

   ट्रम्प सरकार ने क्रमशः पेरिस जलवायु समझौता, यूनेस्को, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और ईरानी परमाणु मुद्दे पर व्यापक समझौता आदि में से हटने की घोषणा की। साथ ही अमेरिका ने चीन, यूरोपीय संघ, जापान, मेक्सिको और कनाडा आदि व्यापार सहपाठियों पर दबाव बनाया। अमेरिका का विचार है कि द्वितीय महायुद्ध की समाप्ति पर स्थापित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और व्यापार नियम आज उस के हितों के अनुकूल नहीं है। इसलिए अमेरिका पुरानी व्यवस्था को पलट कर अपना वर्चस्व वाली एकध्रुवीय दुनिया स्थापित करना चाहता है।

    लेकिन अमेरिका का "यूएस फर्स्ट" नारा लगाने से अमेरिका ने खुद को हानि पहुंचायी है। क्योंकि अमेरिका के विश्व में विश्वास कम बनने से इस के हितों के लिए हानिकारक है। साथ ही एकतरफा टैरिफ नीति अपनाने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को चोट पहुंची है। ह्वाइट हाउस के आर्थिक आयोग के प्रधान लैरी कुडलोउ ने हाल में कहा कि अमेरिकी कंपनियों को सरकार द्वारा उन्नत की गयी अतिरिक्त कर वसुली का भुगतान करना पड़ेगा। और अंत तक उपभोक्ताओं को लागत चुकानी पड़ेगी। रिपोर्ट है कि अधिक कर वसुली से वर्ष 2018 में अमेरिका की कृषि आय में 12 प्रतिशत की कटौती संपन्न हुई। अगर अमेरिका चीनी मालों के प्रति 25 प्रतिशत अतिरिक्त कर वसुली की जाएगी, तो अमेरिका में प्रति वर्ष 9 लाख 34 हजार रोजगार के मौके कम हो जाएंगे।

    21वीं शताब्दी की दुनिया समान भाग्य वाली दुनिया है। अमेरिका द्वारा अपनी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी को छोड़ने और दूसरे देशों के मालों को अतिरिक्त कर वसुली लगाने से विश्व के दूसरे देशों में घृणा और प्रतिरोध की भावना पैदा होगी। चीन ने अमेरिका के व्यापारिक दबाव के प्रति अपना स्पष्ट रुख प्रकट किया है। यूरोपीय संघ और जापान ने भी अमेरिका के कर वसुली संबंधी प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। वैश्वीकरण और बहुध्रुवीयकरण का रूझान होने के चलते अमेरिका बंद अलगाव की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका के प्रति सारी दुनिया का विश्वास घटेगा।

(साभार---चाइना रेडियो इंटरनेशनल ,पेइचिंग)

 

 

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Web Title: The world will lose faith in America

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