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प्रशांत महासागरीय द्वीप देश किरिबाती गणराज्य ने 20 सितंबर को एक-चीन सिद्धांत की मान्यता की घोषणा की और ताइवान के साथ तथाकथित "राजनयिक संबंधों" को तोड़कर चीन के साथ राजनयिक संबंधों को बहाल किया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कंग श्वांग ने इस बात को लेकर कहा कि चीन संप्रभु स्वतंत्र देश किरिबाती गणराज्य के इस महत्वपूर्ण निर्णय का समर्थन करता है।

चीनी प्रवक्ता ने कहा कि दुनिया में एक ही चीन मौजूद है। चीन जनवादी गणराज्य की सरकार पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र कानूनी सरकार है। ताइवान चीन का एक अविभाज्य हिस्सा है। इस तथ्य की पुष्टि न केवल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत की गई है बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आम सहमति भी है। एक-चीन सिद्धांत के आधार पर चीन ने अब तक पूरी दुनिया में कुल 178 देशों के साथ औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं। 

प्रवक्ता ने कहा कि हाल के दिनों में प्रशांत द्वीप देश सोलोमन द्वीपों और किरिबाती गणराज्य ने एक के बाद एक एक-चीन सिद्धांत को मान्यता देकर ताइवान के साथ तथाकथित "राजनयिक संबंधों" को तोड़कर चीन के साथ या तो राजनयिक संबंध स्थापित किया या राजनयिक संबंधों की बहाली की। इससे जाहिर है कि एक-चीन सिद्धांत का पालन करना सही दिशा है। अब चीन के प्रशांत द्वीप देशों के साथ संबंध तेजी से विकसित हो रहे हैं। भले ही चीन और किरिबाती गणराज्य के बीच के संबंधों में गड़बड़ी हुई थी, लेकिन दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती लगातार बढ़ रही है। चीन किरिबाती गणराज्य के एक-चीन सिद्धांत के आधार पर चीन-प्रशांत द्वीप देश सहयोग में लौटने का स्वागत करता है। आशा है कि दोनों देश एक साथ कोशिश करके दोनों देशों के संबंधों को एक नए स्तर पर पहुँचा सकेंगे।

किरिबाती गणराज्य और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की बहाली होने के बाद अब ताइवान के केवल 15 देशों के साथ राजनयिक संबंध बनाये रखे गये हैं। किरिबाती से पहले सोलोमन ने भी चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किये। इससे यह जाहिर है कि एक चीन का सिद्धांत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में व्यापक मान्यता प्राप्त है। इधर के सालों में ताइवान ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में "मनी डिप्लोमेसी" की नीति अपनाकर संबंधित देशों और क्षेत्रों में अस्थिरता पैदा की है। जिससे यह साफ हुआ है कि ताइवान इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास की मदद नहीं, बल्कि "दो चीन" या "एक चीन, एक ताइवान" का भयावह उद्देश्य पूरा करना चाहता है।  

  उधर चीन सभी देशों, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, को समानता के सिद्धांत पर स्वतंत्र विकास अधिकार का समादर करता है और इन के आर्थिक विकास और जन जीवन में सुधार करने का समर्थन करता है। चीन ने प्रशांत महासागरीय देशों को यथासंभव सहायता प्रदान की है और इन के लिए बाजार खोलकर अधिक आयात किया है। “बेल्ट एंड रोड” के निर्माण के साथ साथ चीन और प्रशांत महासागरीय देशों के बीच व्यापार रकम वर्ष 2012 के 4.51 अरब अमेरिकी डालर से बढ़कर वर्ष 2017 के 8.2 अरब अमेरिकी डालर तक जा पहुंचा है। चीन के साथ व्यापार करने से इन देशों के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है।  

     इधर के वर्षों में ताइवान के साथ राजनयिक संबंध बनाये रखने वाले देशों ने ताइवानी सत्ता को छोड़कर चीन के साथ संबंध कायम किये। यह उन देशों द्वारा अपने हित और जनता की उम्मीद के अनुसार किया गया सही फैसला है।  

    ताइवान की मौजूदा सरकार के सत्ता पर आने से अभी तक कुल सात देशों ने ताइवान के साथ राजनयिक संबंधों को तोड़ दिया है। पानामा के उप विदेश मंत्री  लूइस मिगुल हिनकैपी ने कहा कि पानामा और चीन के बीच अनेक सहयोग समझौते संपन्न होने से पानामा-चीन प्रत्यक्ष उड़ान सेवा कायम होने लगी। बहुत से चीनी कारोबार पानामा में प्रविष्ट हुए हैं। विश्वास है कि पानामा चीन संबंधों को मजबूत किया जाएगा। उन के बीच आर्थिक दृष्टि से चीन और प्रशांत महासागरीय देश एक दूसरे के पूरक हैं। व्यापार, निवेश, मत्स्य पालन, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के निर्माण आदि में सहयोग की बड़ी संभावना मौजूद है। वर्ष 2018 के नवम्बर में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रशांत महासागरीय देशों के नेताओं ने सामूहिक तौर पर भेंट वार्ता करते समय इस बात पर सहमत जताया कि चीन और इन देशों के बीच संबंधों को आपसी समादर और समान विकास के रणनीतिक साझेदार के स्तर तक पहुचाया जाएगा।   

 “एक चीन” सिद्धांत को मान्यता देने का रूझान अनिवार्य है। इसी सिद्धांत पर चीन ने विश्व में 178 देशों के साथ राजनयिक संबंध कायम किये हैं। आशा है कि ताइवानी अधिकारी स्थितियों की साफ साफ पहचान कर सही फैसला लेंगे। नहीं तो इस के साथ संबंध तोड़ने की प्रवृत्ति जारी रहेगी। 

(साभार---चाइना रेडियो इंटरनेशनल ,पेइचिंग)

   

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Web Title: Restoration of diplomatic relations between the Republic of Kiribati and China

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