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इन दिनों तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के विभिन्न मठों में बुद्ध आकृति वाली विशाल थांगखा चित्र की प्रदर्शन गतिविधि आयोजित हो रही है। 16 जुलाई को शिकाज़े शहर में जाशी च्येनपाई मठ में बुद्ध शाक्यमुनि की थांगखा चित्र का प्रदर्शन हुआ। यह मठ शिकाज़े शहर की श्येथोंगमन काउंटी में स्थित है, जिसकी स्थापना 14वीं सदी में हुई, जो तिब्बती बौद्ध धर्म में गेलुग संप्रदाय का मंदिर है।   

   वहीं, 15 जुलाई को शिकाज़े स्थित ताश्हिलहुंपो मठ में भी अमिताभ बुद्ध का विशाल थांगखा प्रदर्थित किया गया। इसी दिन से ही ताश्हिलहुंपो मठ में लगातार तीन दिनों तक बुद्ध आकृति वाली थांगखा चित्र प्रदर्शित की जा रही है। पहले दिन प्रदर्शित थांगखा चित्र की ऊँचाई 40 मीटर है और लम्बाई 38 मीटर है। तिब्बती बौद्ध धर्म में अमिताभ बुद्ध को“भूतकाल बुद्ध”माना जाता है। 

   जानकारी के अनुसार, ताश्हिलहुंपो मठ तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शिकाजे शहर के पश्चिमी भाग में स्थित है। वर्ष 1447 में तिब्बती बौद्ध धर्म के गेलुग संप्रदाय के गुरू चोंगखापा के शिष्य गेन्डुन ज़ुबा यानी पहले दलाई लामा ने इस मठ का निर्माण करवाया। तिब्बती बौद्ध धर्म के गेलुग संप्रदाय के सुप्रसिद्ध मठ के रूप में ताश्हिलहुंपो मठ चौथे पंचन लामा और उन के परवर्ती पंचन लामाओं का निवास स्थान बन गया।

(साभार---चाइना रेडियो इंटरनेशनल ,पेइचिंग)

 

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Web Title: Demonstration of Buddha-shaped Thangakhas in Tibetan monasteries

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