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चीनी राज्य परिषद के समाचार कार्यालय ने 2 जून को "चीन-अमेरिका आर्थिक और व्यापार विचार-विमर्श पर चीन का रुख" शीर्षक श्वेत पत्र जारी किया। जिसने चीन-अमेरिका व्यापार घर्षण के प्रभाव, अमेरिका द्वारा अपने वचनों को तोड़ा जाने तथा व्यापार वार्ता के प्रति चीन के सैद्धांतिक रुख के तीन दृष्टि से चीन और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता संबंधित सत्यों पर प्रकाश डाला है।

  बीते एक साल में चीन और अमेरिका के बीच कुल ग्यारह चरणों की वरिष्ठ वार्ताएं आयोजित की गयी हैं। लेकिन अमेरिका ने बार-बार अपने वचनों को तोड़ दिया, चीनी मालों को अधिक कर वसूली लगाने का फैसला लिया और वार्ता में असफल होने का दोष चीन पर लगा दिया।  

    चीनी जनता के हितों और विकास अधिकार की रक्षा करने के लिए चीन ने वार्ता के दौरान संयम का रुख अपनाया। लेकिन इस का मतलब नहीं है कि चीन अपने के ऊपर अनुचित मांग करने और बदनाम लगाने का स्वीकार कर सकेगा। 2 जून को प्रकाशित श्वेत पत्र का उद्देश्य विश्व को चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता की सच्चाई का परिचय देना है, और महत्वपूर्ण सवालों पर चीन की रियायत न देने की कल्पना जाहिर करना है। ताकि इससे चीन के खिलाफ़ अत्यधिक दबाव देने वाले व्यक्तियों को अपनी कल्पनाओं से त्याग दिया जा सके।   

   इस श्वेत पत्र में चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता से संबंधित तीन सत्यों पर प्रकाश डाला गया है।

    पहला है कि चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता के असफल होने का कारण यही है कि अमेरिका ने तीन बार अपने वचनों को तोड़ा है। अमेरिका ने वार्ता के असफल होने का दोष चीन पर लगाना चाहा। लेकिन तथ्य यह है कि अमेरिका ने ईमानदार रुख को छोड़कर चीन को अत्यधिक दबाव डाला और इसी वजह से वार्ता विफल हुआ। श्वेत पत्र के अनुसार अमेरिका ने वर्ष 2018 के मार्च, वर्ष 2018 के मई और वर्ष 2019 के मई में तीन बार अपने वचनों को तोड़ दिया। अमेरिका द्वारा अनुचित मांग की जाने से चीन को विवश होकर जवाबी कदम उठाना पड़ा।

दूसरा है कि चीन की तकनीकी नवाचार और प्रगतियां चीनी जनता की आत्म-निर्भरता तथा कठोर संघर्ष से आधारित है। वह किसी के यहां से चोरी करने का परिणाम नहीं है। अमेरिका ने बौद्धिक संपदा अधिकारों की "चोरी" और अनिवार्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के बहाने पर चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध किया। अनेक चरणों की वार्ता में अमेरिका ने अपनी चिन्ताएं व्यक्त कीं। इस के प्रति श्वेत पत्र ने बहुत से आंकड़ों खासकर अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स और पत्रिकाओं के हवाले से चीन में बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण प्रणाली की स्थापना, नवाचार संकेतक और अनिवार्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का विरोध करने के संदर्भ में तथ्यों का परिचय दिया। इनसे यह जाहिर है कि अमेरिका द्वारा किया गया आरोप बिल्कुल निराधार है।  

   तीसरा है कि अधिक कर लगाने से दूसरे को क्षति पहुंचाने के साथ साथ अपने के लिए भी हानिकारक है, इससे अमेरिका को एक बार फिर "महान" नहीं बनाया गया है। अमेरिका का दावा है कि अधिक कर लगाने से व्यापारिक घाटी को कम किया जाएगा और अमेरिका की वृद्धि को बढ़ाया जाएगा। लेकिन तथ्य यही है कि वर्ष 2018 में अमेरिका की चीन के साथ व्यापारिक घाटी पिछले साल से 11.6 प्रतिशत बढ़ी, जबकि सोयाबीन के चीन को निर्यात में 50 प्रतिशत कमी की गयी। मोटर गाड़ियों के निर्यात में भी 20 प्रतिशत कटौती नजर आयी। अधिक कर वसूली से अमेरिका में दाम स्तर को बढ़ाया गया, अमेरिकी आर्थिक विकास को प्रभावित किया गया और अमेरिका के जन जीवन तथा निर्यात को रोका गया। साथ ही विश्व अर्थतंत्र की बहाली को गंभीर चुनौती संपन्न की गयी है। अमेरिका ने यह ऐलान किया कि व्यापार युद्ध से अमेरिका को एक बार फिर महान बनाया जाएगा। पर तथ्यों से जाहिर है कि यह बिल्कुल गलत है।

श्वेत पत्र के मुताबिक चीन हमेशा वार्ता के जरिये समस्याओं का समाधान करने का पक्षधर है। लेकिन व्यापार वार्ता करने के लिए दोनों पक्षों को समान दिशा में जाना ही पड़ेगा। चीन व्यापार युद्ध करना नहीं चाहता है। पर चीन इससे नहीं डरेगा। और आवश्यकता पर चीन को ऐसे युद्ध का सामना करना पड़ेगा। भविष्य में चाहे स्थितियों में कैसा परिवर्तन आएगा, चीन अच्छी तरह अपने कामकाज समाप्त करेगा और रुपांतर और खुलेपन के माध्यम से अपना विकास लक्ष्य को साकार करेगा। यह चीन का व्यापार घर्षण के मुकाबले में मूल रास्ता होगा।

(साभार-चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)

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Web Title: China has highlighted three truths of American economic and business discussions.

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