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अमेरिकी सीनेट सदस्य मार्को रूबियो समेत कुछ लोगों ने चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक, व्यापारिक, वैज्ञानिक और मानवीय जुड़ाव को हटाने का दावा किया। लेकिन उन्होंने अमेरिका के इस इतिहास की जानकारी प्राप्त नहीं की है कि अमेरिकी पूर्वजों ने चीन के साथ व्यापार करने से अपना अमीर जीवन स्थापित किया था। 

     सन 1784, 22 फरवरी को स्वतंत्रता प्राप्त अमेरिका ने ब्रिटेन की आर्थिक नाकेबंदी को तोड़कर चीनी महारानी नामक जहाज चीन के साथ व्यापार करने के लिए भेजी। कुछ महीने बाद की 28 अगस्त को यह जहाज दक्षिणी चीन के क्वांगचो शहर तक जा पहुंची। क्वांगचो शहर में तीन महीनों के लिए ठहरते समय अमेरिकी व्यापारियों ने चीन को अमेरिकी जिनसेंग, काली मिर्च, कपास, यार्न, सीसा आदि बेचे और चीन से चाय, चीनी बर्तन, सिल्क, कपड़े और सिनेमोन आदि खरीद लिये। इसी यात्रा से अमेरिकी व्यापारियों ने तीस हजार अमेरिकी डालर मुनाफा कमायी। इसी यात्रा की सफलता से अमेरिकी व्यापारियों को प्रेरित किया गया था। इसके बाद अमेरिकी व्यापारियों ने लगातार चीन के साथ व्यापार करने वाले समुद्री सिल्क रोड पर अभियान शुरू किया था। 18वीं शताब्दी के अंतिम दशक में अमेरिका होलैंड, डेंमार्क, फ्रांस और पुर्तगाल से बढ़कर, ईंगलैंड के बाद चीन का दूसरा बड़ा व्यापारी सहपाठी बना था। अमेरिकी बाजारों में चीनी मालों का व्यापक स्वागत किया जा रहा था। यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने भी दूसरों के माध्यम से चीनी मिट्टी के बरतन की थाली, पतले सूती कपड़े और रेशम के रूमाल आदि चीनी माल खरीदा था।   

इधर लोग देखते हैं कि दो सौ साल पहले अमेरिका ने ब्रिटेन की आर्थिक नाकेबंदी को तोड़कर चीन के साथ व्यापार किया था और समृद्ध परीणाम प्राप्त किया था। दो सौ साल बाद चीन और अमेरिका एक दूसरे के लिए सबसे बड़ा व्यापार सहपाठी और निवेशक बन गये हैं। वर्ष 2018 में चीन-अमेरिका व्यापार की रकम 6 खरब 33.5 अरब अमेरिकी डालर तक जा पहुंची है। प्रति दिन चीन और अमेरिका के बीच आवाजाही की संख्या 14 हजार तक जा पहुंची है। चीन में स्थापित अमेरिकी कारोबारों की बिक्री रकम सात खरब अमेरिकी डालर तक जा पहुंची है। उन का मुनाफा भी 50 अमेरिकी डालर तक रहा है।  

हाल ही में छह सौ से अधिक अमेरिकी कारोबारों ने अमेरिकी सरकार को पत्र भेजकर चीन के साथ व्यापार घर्षण को हल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अधिक चुंगी लगाने से अमेरिकी कारोबारों और उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुंचेगा। हाल में आयोजित एक परामर्श मीटिंग में अमेरिकी कपड़े निर्माता और बच्चों के उत्पाद निर्माता समेत अनेक कारोबारों और उद्योगधंधों के संघों ने चीनी मालों पर अधिक चुंगी लगाने का विरोध प्रकट किया। उन का मानना है कि चीन और अमेरिका के अर्थतंत्र को घनिष्ठ रूप से जोड़ा गया है। अमेरिकी निर्माता चीनी कारोबारों के उत्पादन से अलग नहीं हो सकते हैं। अधिक चुंगी लगाने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचेगा।    

     चीन और अमेरिका के बीच व्यापार का पैमाना विशाल है। उन के बीच व्यापार घर्षण होना भी स्वाभाविक है, पर इन्हें जो करना चाहिये वह है सही ढ़ंग से मतभेदों को नियंत्रित करना। चीन और अमेरिका के बीच जुड़ाव को हटाने का कथन भी बहुत खतरनाक और गैर-जिम्मेदारना ही है। इतिहास और तथ्यों से यह साबित हुआ है कि चीन और अमेरिका के बीच सहयोग दोनों देशों के हित में है और प्रतिद्वंद्विता से दोनों देशों को नुकसान पहुंचेगा। अमेरिका को तथ्यों से सबक लेना चाहिये कि चीन के साथ जुड़ाव हटाने से भविष्य में मौकों से हाथ धो बैठेगा। 

(साभार-चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)

 

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Web Title: China and America will not lose economic engagement

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