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पुणो के वैज्ञनिकों के एक समूह ने कैंसर के प्रसार का शुरूआत में ही पता लगाने के लिए एक तरल बायोप्सी प्रौद्योगिकी विकसित की है और दावा किया है कि यह दुनिया में सबसे तेज़ ढंग से काम करती है। उन्होंने कहा कि दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की राष्ट्रीय नियामक संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने उनकी ऑनकोडिस्कवर प्रौद्योगिकी को मंजूरी दे दी है। पुणो से संचालित स्टार्ट-अप एक्टोरियस इनोवेशन एंड रिसर्च के मुख्य वैज्ञनिक अधिकारी डॉ. जयंत खंडारे ने कहा, इस प्रौद्योगिकी से भारत में कैंसर रोग का शीघ्र पता लगाने और प्रबंधन में क्रांति आने की उम्मीद है।     

उन्होंने कहा, ऑनकोडिस्कवर कैंसर कोशिकाओं में मेटास्टेसिस की शुरुआत का पता लगाने के लिए नए चिकित्सा उपकरण दिशानिर्देश, 2017 के तहत बिक्री के लिए लाइसेंस हासिल करने वाली अपने आप में पहली प्रौद्योगिकी है।  खंडारे ने पीटीआई-भाषा को बताया कि एक्टोरियस ने स्वदेशी रूप से कैंसर के शुरुआती प्रसार का पता लगाने के लिए अधिक विशिष्ट, अत्यधिक तेज और कुशल कैंसर निदान तकनीक विकसित की है। उन्होंने कहा कि इस स्टार्ट-अप को जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद द्वारा उच्च जोखिम वाले नवाचारों के लिए वित्त पोषित किया गया है। यह परिषद जैव प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से उद्योगों को सहायता प्रदान करती है। खंडारे और अरविंदन वासुदेवन के नेतृत्व में वैज्ञनिकों की एक टीम ने फेफड़े, स्तन, कोलोरेक्टल, सिर और गर्दन के कैंसर में ट्यूमर कोशिकाओं (सीटीसी) का पता लगाने में तकनीकी चुनौतियों पर काम किया। 

खंडारे ने कहा, सीटीसी संख्या में बहुत कम होती हैं। एक सीटीसी की गणना लाखों रक्त कोशिकाओं में की जाती है। एक मरीज के खून में उनको अलग करना भूसे में सुई खोजने जैसा है।  उन्होंने कहा कि नई प्रौद्योगिकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट किया गया है और कई नैदानिक ??परीक्षणों के माध्यम से चिकित्सकीय रूप से मान्य घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की एफडीए द्वारा अनुमोदित ऐसी ही सीटीसी जांच परीक्षण की लागत 1,000 अमेरिकी डॉलर आती है और ज्यादातर भारतीयों के लिए यह महंगी प्रौद्योगिकी है। ऑनकोडिस्कवर बहुत लागत में आती है। उन्होंने कहा कि यह जांच अब पुणो में भारत में कैंसर रोगियों के लिए ऑनकोडिस्कवर लिक्विड बायोप्सी टेक्नोलॉजी लैब में उपलब्ध है। खंडारे को 2011 में अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट अनुभवी शोधकर्ता फैलोशिप से मैक्रोमॉलीक्युलर रसायन विज्ञन में अपने शोध के लिए सम्मानित किया गया था। जर्मनी स्थित हम्बोल्ट फाउंडेशन यह पुरस्कार देता है और यह पुरस्कार पाने वाले 44 वैज्ञनिक नोबेल पुरस्कार जीत चुके हैं।

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Web Title: Pune's scientists developed technology to detect cancer in early stages

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