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सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ने के साथ ही स्मार्ट फोन उपयोगकर्ताओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। औसतन तीन से चार घंटे का समय युवा इस पर बिता रहे हैं। मोबाइल फोन का उपयोग बढ़ने से नई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं।

अनमोल कही जाने वाली आंखों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। नेत्ररोग विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार मोबाइल स्क्रीन पर एक टक देखने से आंखों का ब्लिंकिंग रेट कम हो गया है। सामान्य तौर पर प्रति मिनट 12 से 14 बार आंखे ब्लिंकिंग करती हैं, लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर बने रहने पर ब्लिंकिंग रेट छह से सात हो जाता है। इससे आंखों में ड्राइनेस बढ़ रही है और आंखें कमजोर हो रही हैं।

कंप्यूटर पर काम करते समय स्क्रीन के सामने से हटकर थोड़ा ब्रेक ले। आंखों के लिए लगातार कंप्यूटर के सामने न बैठे रहे। 

समय-समय पर कंप्यूटर स्क्रीन से नजर हटाकर किसी दूसरी जगह पर नजर डाले।

रात के समय स्क्रीन का ब्राइटनेस कम रखें साथ ही कंप्यूटर स्क्रीन से थोड़ी दुरी बना के रखे।

इस बात का विशेष ध्यान रखे की कंप्यूटर स्क्रीन आंखों से नीचे रखे। 

स्क्रीन पर काम करते समय अपनी पलकें झपकाते रहें।

आंखों मे आई ड्रॉप डॉक्टर की सलाह पर ही डालें। 

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Web Title: how mobile phone screen become problem for eyes

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