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किशोरावस्था के दौरान बच्चे और माता-पिता के बीच का रिश्ता बड़े ही नाजुक दौर से गुजर रहा होता है। इस समय जहां बच्चे का साक्षात्कार नए अनुभवों से हो रहा होता है वहीं भावनात्मक उथल-पुथल भी हावी रहती है। बच्चे इस उम्र में खुद को साबित करने और अपना व्यक्तित्व निखारने की जद्दोजहद में लगे होते है। अगर आप जान लें कि आपके बच्चे के दिमाग में क्या चल रहा है तो इस स्थिति से निपटना शायद आपके लिए आसान हो जाएगा।  किशोरावस्था की शुरुआत अपने साथ बहुत से शारीरिक बदलावों के साथ-साथ हार्मोनल बदलाव भी लाती है जो मिजाज में उतार-चढ़ाव और बिल्कुल अनचाहे बर्ताव के रूप में सामने आता है। ऐसे में बच्चे के साथ बेहतर तालमेल बैठाने के लिए पेरैंट्स को कुछ बातों का ख्याल जरूर रखना चाहिए।

* दें अच्छे संस्कार
घर में एक-दूसरे के साथ कैसे पेश आना है, जिंदगी में किन आदर्शो को अहमियत देनी है,अच्छाई से जुड़कर कैसे रहना है और बुराई से कैसे दूरी बढ़ानी है जैसी बातों का ज्ञान ही संस्कार हैं। इस की बुनियाद एक परिवार ही रखता है। पेरैंट्स ही बच्चों में इसके बीज डालते हैं। ये कुछ भी हो सकते हैं जैसे ईमानदारी, बड़ों का आदर करना, जिम्मेदार बनना, नशे से दूर रहना, हमेशा सच बोलना, घर में दूसरों से कैसे पेश आना है आदि, इन सभी बातों को लिखकर अपने बच्चे के कमरे में चिपका दें ताकि ये बातें बार-बार उसके दिमाग में चलती रहे और वह इन बातों को जल्दी याद कर पाए।

* थोड़ी आजादी भी दें
घर में आजादी का माहौल पैदा करें। बच्चे को जबरदस्ती किसी बात के लिए नहीं मनाया जा सकता। मगर जब आप सही गलत का भेद समझा कर फैसला उस पर छोड़ देंगे तो वह सही रास्ता ही चुनेगा। उसपर किसी तरह का दवाब डालने से बचिए। बच्चा जितना ज्यादा अपने-आप को दबा-कुचला महसूस करेगा उसका बर्ताव उतना ही उग्र होगा। अपने किशोर/युवा बच्चों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए जरूरी छूट दें। याद रखें कि आप का बच्चा बड़ा हो रहा है। उसे अपने ज•बात जाहिर करने दें पर उसे यह अहसास भी कराएं कि वह मर्यादा की हदें न लांघे।

* माता-पिता के रूप में खुद मिसाल बनें
बच्चे के लिए खुद मिसाल बनें। बच्चे से आप जो भी कुछ सीखने या न सीखने की उम्मीद करते हैं पहले उसे खुद अपनाएं। ध्यान रखें बच्चे हमारे नक्शे-कदम पर चलते हैं। आप उन्हें सफलता के लिए मेहनत करते देखना चाहते हैं तो पहले खुद अपने काम के प्रति समर्पित रहे। बच्चों से सच्चाई की चाह रखते हैं तो कभी खुद झूठ न बोले।

* सजा भी दें और ईनाम भी
बच्चों को बुरे कामों के लिए डांटना जरूरी है तो वहीं वे कुछ अच्छा करते हैं तो उनकी तारीफ करना भी न भूलें। आप उन्हें सजा भी दें और ईनाम भी। अगर आप ऐसा करेंगे तो बच्चे को निश्चित ही इस का फायदा मिलेगा। वे बुरा करने से घबराएंगे जबकि अच्छा करके ईनाम पाने को लेकर उत्साहित रहेंगे। यहां सजा देने का मतलब शारीरिक तकलीफ देना नहीं है बल्कि यह उन को मिलने वाली छूट में कटौती करके भी दी जा सकती है, जैसे टी.वी. देखने के समय को घटा कर या उन्हें घर के कामों में लगा कर।

* अनुशासन को लेकर संतुलित नजरिया
जब आप अनुशासन को लेकर एक संतुलित नजरिया कायम कर लेते हैं तो आप के बच्चे को पता चल जाता है कि कुछ नियम हैं जिनका उसे पालन करना है पर जरूरत पड़ने पर कभी-कभी इन्हें थोड़ा बहुत बदला भी जा सकता है। इस के विपरीत यदि आप हिटलर की तरह हर परिस्थिति में उसके ऊपर कठोर अनुशासन की तलवार लटकाए रहेंगे तो संभव है कि उस के अंदर विद्रोह की भावना जल उठे।

* घरेलू कामकाज को जरूरी बनाना
बच्चे को शुरू से ही अपने काम खुद करने की आदत लगवाएं। मसलन अपना कमरा, बिस्तर, कपड़े आदि सही करने से लेकर दूसरी छोटी-मोटी जिम्मेदारियों का भार उन पर डालें। हो सकता है कि इसकी शुरुआत करने में मुश्किल हो मगर समय के साथ आप राहत महसूस करेंगे और बाद में उन्हे जीवन में अव्यवस्थित देख के गुस्सा करने की संभावना खत्म हो जाएगी।

* अच्छी संगत
शुरू से ध्यान रखें और प्रयास करें कि आपके बच्चे की संगत अच्छी हो। अगर आप का बच्चा किसी खास दोस्त के साथ बंद कमरे में घण्टों का समय गुजारता है तो समझ जाइए कि यह खतरे की घण्टी है। इसकी अनदेखी न करें। इस बंद दरवाजे के खेल को तुरंत रोकें। इस से पहले कि बच्चा गलत रास्ते पर चल निकले और आप हाथ मलते रह जाएं थोड़ी सख्ती और दृढ़ता से काम लें। बच्चे को समझाएं और सुधार के लिए जरूरी कदम उठाएं। इसी तरह दिन-रात वह मोबाइल से चिपका रहे या किसी से चैटिंग में लगा रहे तो भी आप को सावधान हो जाना चाहिए।

* सबके सामने बच्चे को कभी भी न डांटे
दूसरों के आगे बच्चे को डांटना उचित नहीं। याद रखें जब आप अकेले में समझाते हुए, वजह बताते हुए बच्चे को कोई काम से रोकेंगे तो इस का असर पॉजिटिव होगा। इस के विपरीत सब के सामने बच्चों के साथ डांट-फटकार करने से बच्चा जिद्दी और विद्रोही बनने लगता है। किसी भी समस्या से निपटने की सही जगह है आपका घर। इस के लिए आप को सब्र से काम लेना होगा। दूसरों के सामने खासकर उस के दोस्तों के सामने हर बात में गलतियां न निकालें और न ही उसे बेइज्ज़त करें। क्योंकि ऐसी बातें वह कभी भूल नहीं पाएगा और आपको अपना दुश्मन समझने लगेगा।

* उसकी पसंद को भी मान दें
आपका बच्चा जवान हो रहा है और चीजों को पसंद और नापसंद करने का उसका अपना नजरिया है इस सच्चाई को समझने का प्रयास करें। अपनी इच्छाओं और पसंद को उस पर थोपने की कोशिश न करें। किसी बात को लेकर बच्चे पर दवाब न डालें जब तक आपके पास इसके लिए कोई वाज़िब वजह न हो।

* क्वालिटी टाइम बिताएं
यह सच है कि किशोर/युवा हो रहे बच्चे माता-पिता को अपनी जिंदगी से जुड़ी हर बात साझा करने से बचते हैं। पर इसका मतलब यह नहीं कि आप प्रयास ही न करें। प्रयास करने का मतलब यह नहीं कि आप जबरदस्ती करें और उनसे हर समय पूछताछ करते रहे। इसके विपरीत जरु रत है बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और उनसे दोस्ताना रिश्ता बनाने की। उन के साथ फिल्म देखना, बाहर खाने के लिए जाना और खुले में उनके साथ कोई मजेदार खेल खेलना वगैरह। इससे बच्चा खुद को आप से कनैक्टेड महसूस करेगा और खुद ही आप से अपनी हर बात शेयर करने लगेगा।

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Web Title: Parents must take care of these things to better coordinate with the child

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