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अपने करियर की शुरुआत कृति सनन ने 2014 में फिल्म हीरोपंती से की थी। इस फिल्म ने उन्हें बॉलीवुड में एक पहचान दी लेकिन बाद में सुशांत सिंह राजपूत के संग आई उनकी फिल्म ‘राब्ता’ की असफलता ने उनके करियर पर विराम लगा दिया था। अब 2019 कृति के लिए लकी साबित हो रहा है। फिल्म ‘लुका छुपी’ और ‘कलंक’ के बाद इस वर्ष उनकी चार और बड़े बजट की फिल्में रिलीज होने वाली हैं। इन दिनों कृति के सितारे बुलंद हैं। जहां उनकी फिल्म ‘लुका छुपी’ सौ करोड़ के क्लब में शामिल हो चुकी है, वहीं हालिया रिलीज फिल्म ‘कलंक’ में सॉन्ग ‘ऐरा गैरा’ पर किया उनका डांस धूम मचा रहा है। साथ ही डायरैक्टर आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘पानीपत’ में भी कृति काफी चैलेंजिंग रोल निभा रही हैं। वह कई और बड़ी फिल्मों में भी बड़े स्टार्स के साथ नजर आएंगी। करियर के बहुत ही अहम मोड़ से गुजर रहीं कृति सनन से हुई बातचीत..
फिल्म ‘कलंक’ के ‘ऐरा गैरा’ सॉन्ग में आप वरुण धवन के साथ डांस करते नजर आईं, क्या आगे भी आप फिल्मों में सिर्फ एक डांस में नजर आने के लिए तैयार हो जाएंगी?
मैंने फिल्म ‘स्त्री’ के सॉन्ग ‘आओ कभी हवेली पे.’ में डांस किया था, दर्शकों ने मुङो काफी पसंद किया। अब लोग फिल्म ‘कलंक’ के गीत ‘ऐरा गैरा’ में मेरे डांस की तारीफ कर रहे हैं, जबकि लोगों को यह फिल्म पसंद नहीं आई। वैसे डांस मेरा शौक है। अगर किसी फिल्म में कोई अच्छा गाना है, जिस पर डांस करने का अवसर मिल रहा है, तो कलाकार के रूप में इसे क्यों छोड़ दूं। मेरी नजर में कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता।

आप ग्लैमरस और डी-ग्लैमरस हर तरह के किरदार निभा रही हैं?
मेरा एक्सपीरियंस यह कहता है कि जब हम डी-ग्लैमरस किरदार निभाते हैं, तो दर्शक हमारी एक्टिंग पर ज्यादा ध्यान देते हैं। उन्हें लगता है कि डी-ग्लैमरस एक्ट्रेस बेहतरीन एक्टिंग कर सकती है। एक बार आपकी पहचान एक बेहतरीन एक्ट्रेस के तौर पर हो जाए, उसके बाद आप अगर ग्लैमरस किरदार निभाती हैं, तो कोई फर्क नहीं पड़ता। मैंने पहले डी-ग्लैमरस रोल निभाए फिर ग्लैमरस। क्योंकि पहले मुङो यह साबित करना जरूरी था कि मेरे अंदर एक्टिंग टैलेंट है। अब मेरे अंदर रिस्क उठाने का कॉन्फिडैंस आ चुका है। इतना ही नहीं मुङो लेकर फिल्मकारों और दर्शकों, दोनों का माइंड सैट बदल चुका है। अब मेरे पास स्ट्रॉन्ग रोल के ऑफर आ रहे हैं।

‘लुका छुपी’ की सफलता आपके लिए क्या मायने रखती है?
इस फिल्म में मैंने छोटे शहर की लड़की रश्मि का किरदार निभाया, जिसे लोगों ने काफी सराहा। जब हमारी फिल्म की तारीफ क्रिटिक और ऑडियंस दोनों करते हैं, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई करती है, हमें लगता है कि दर्शकों ने कलाकार के तौर पर हमें एक्सैप्ट कर लिया है। दर्शक हमसे जुड़ रहे हैं। इससे मेरा मॉरल बूस्टअप होने के साथ ही, कॉन्फिडैंस भी बढ़ता है। इतना ही नहीं, जब दर्शक हमारी एक्टिंग की तारीफ करते हैं, तो कलाकार के तौर पर हमारे अंदर कुछ नया प्रयोग करने की इच्छा मजबूत होती है।
आपकी फिल्म ‘लुका छुपी’ सौ करोड़ क्लब का हिस्सा बन गई है। इस तरह तो आगे आपके सामने अपनी हर फिल्म के सौ करोड़ क्लब का हिस्सा बनने का दबाव रहेगा?
एक कलाकार के तौर पर हम इस तरह का दबाव लेकर काम नहीं करते हैं। हमारे लिए जरूरी होता है कि हम ईमानदारी, लगन और मेहनत के साथ अपनी हर फिल्म के किरदार को पर्दे पर साकार करें बॉक्स ऑफिस की कमाई पर नजर रखना तो हर निर्माता का काम है, लेकिन जब हमारी फिल्म सौ करोड़ क्लब का हिस्सा बनती है, तो हमें खुशी मिलती है। अभी कुछ दिनों पहले तक हमारी फिल्म ने सौ करोड़ का आंकड़ा नहीं पार किया था। मैं उनमें से नहीं हूं जो इस बात का गम मनाएं कि मेरी फिल्म ने सौ करोड़ की बजाय 99 करोड़ ही कमाए। मैं तो चाहती हूं कि मेरे काम को दर्शक सराहें और निर्माता को नुक्सान न हो।
इन दिनों आप आशुतोष गोवारिकर के डायरैक्शन में फिल्म ‘पानीपत’ कर रही हैं। इस फिल्म के बारे में कुछ बताइए?
यह हिस्टोरिकल ड्रामा फिल्म है। सच कहूं तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुङो इस तरह की भव्य फिल्म का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। फिल्म ‘पानीपत’ की कहानी यह बताएगी कि किस वजह से पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ था। फिल्म का निर्माण सुनीता गोवारिकर और साजिद नाडियाडवाला कर रहे हैं। इसमें संजय दत्त और अजरुन कपूर की अहम भूमिकाएं हैं। फिल्म में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संगीतकार अजय अतुल का संगीत है।

फिल्म ‘पानीपत’ में आपका किरदार क्या है?
इसमें मैंने पार्वती बाई का किरदार निभाया है। वह पानीपत के युद्ध के समय की लड़ाकू योद्धा थी। वह मराठा सेना के सेनापति सदाशिव राव भाऊ की पत्नी थी, जो युद्ध कौशल और तलवार बाजी में माहिर थी।

‘पानीपत’ के लिए आपको क्या-क्या सीखना पड़ा?
बहुत कुछ सीखना पड़ा। सबसे पहले तो नौवारी महाराष्ट्रीयन साड़ी पहनने की प्रैक्टिस करनी पड़ी। फिर घुड़सवारी सीखनी पड़ी। यूं तो मैंने फिल्म ‘राब्ता’ के लिए भी घुड़सवारी सीखी थी लेकिन इस फिल्म में मंझी हुई घुड़सवार का मसला था, इसलिए फिर से सीखा। तलवार चलाना सीखा। एक्शन की ट्रेनिंग ली।
फिल्म ‘पानीपत’ के किरदार को निभाना आपके लिए कितना आसान रहा?
आसान तो नहीं रहा लेकिन फिल्म के निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने मेरी समस्या हल कर दी। मैं उत्तर भारतीय हूं। हिंदी और पंजाबी भाषा पर मेरा अधिकार है, लेकिन मराठी भाषा से मेरा कभी संबंध नहीं रहा। ऐसे में फिल्म ‘पानीपत’ में मेरे लिए मराठी भाषी महाराष्ट्रीयन पार्वती बाई के किरदार को निभाना आसान तो नहीं था लेकिन कुछ तैयारी मैंने की, कुछ आशुतोष सर ने मदद की। जिसके चलते फिल्म बहुत अच्छी बनी है।

आपने भी इस फिल्म में एक्शन किया है?
जी हां! निजी जिंदगी में मैंने आज तक कभी तलवार को हाथ नहीं लगाया था। लेकिन पहली बार इस फिल्म में मैंने हाथ में तलवार उठाकर कई एक्शन सीन फिल्माए हैं। यह मेरे लिए बहुत बड़ा चैलेंज रहा क्योंकि जिसने पर्सनल लाइफ में किसी को थप्पड़ भी न मारा हो, उसे अपने चेहरे 

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Web Title: No work is small: Kriti Sanon

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