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हमारे हिन्दू धर्म में हर माह भगवान की पूजा और व्रत-विधि की जाती है जो हमें बहुत से कष्टों से मुक्त करता है। आज हम आपको संकट चतुर्थी के महत्व और कथा के बारे में बताने जा रहे हैं। बता दें कि आज यानि कि 22 फरवरी को संकट चतुर्थी का व्रत और पूजा-पाठ किया जाएगा। आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़ी कथाएं-

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व्रत कथा - सत्ययुग में महाराज हरिश्चंद्र के नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया, पर आवां पका ही नहीं। इस कारण इसके बर्तन कच्चे रह गए. बार-बार नुकसान होते देख उसने एक तांत्रिक से पूछा, तो उसने कहा कि बलि से ही तुम्हारा काम बनेगा। तब उसने तपस्वी ऋषि शर्मा की मृत्यु से बेसहारा हुए उनके पुत्र की सकट चौथ के दिन बलि दे दी। उस लड़के की माता ने उस दिन गणेश पूजा की थी। बहुत तलाशने पर जब पुत्र नहीं मिला, तो मां ने भगवान गणेश से प्रार्थना की।

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सवेरे कुम्हार ने देखा कि वृद्धा का पुत्र तो जीवित था। डर कर कुम्हार ने राजा के सामने अपना पाप स्वीकार किया।राजा ने वृद्धा से इस चमत्कार का रहस्य पूछा, तो उसने गणेश पूजा के विषय में बताया। तब राजा ने सकट चौथ की महिमा को मानते हुए पूरे नगर में गणेश पूजा करने का आदेश दिया। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट हारिणी माना जाता है।


 

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Web Title: sankashti chaturthi 2019

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