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हमारे भारत में कई महानपुरुषों और ऋषि-मुनियों ने जन्म लिया है, जिन्होंने इस धरती को पाप मुक्त और धर्म का पाठ पढ़ाया है। आज हम आपको पृथ्वी पर ऐसे कुल आठ महापुरुष हैं जिन्हें अमरता का वरदान प्राप्त हुआ था और ऐसा माना जाता है कि ये आज भी पृथ्वी पर सशरीर मौजूद हैं। आइये जानते हैं इन अष्ट चिरंजीवियों के बारे में-

ऋषि मार्कंडेय- भगवान भोलेनाथ के परम भक्त, जिन्होंने महामृत्युंजय को सिद्ध कर भोलेनाथ से अमरता का वरदान प्राप्त किया था।

कृपाचार्य- ऋषि शरद्वान गौतम के पुत्र एवं कौरवों तथा पांडवों के कुल गुरु। महाभारत युद्ध में इन्होने कौरवों की तरफ से हिस्सा लिया था।

विभीषण: रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम ने विभीषण को लंका का कार्यभार सौंप देने बाद चिरंजीवी होने का वरदान दिया था।

हनुमान जी- जैसा कि हम सभी को मालूम है, हनुमान जी को अमरत्व का आशीर्वाद प्राप्त है। यह आशीर्वाद उन्हें माता सीता ने अशोक वाटिका में दिया था और यह भी कहा था कि उनकी आराधना करने वाले जातक के सभी संकट सदा के लिए दूर हो जाएंगे।

अश्वत्थामा- पांडवों की सभी संतानों की छल से हत्या कर देने के बाद भगवान कृष्ण अश्वत्थामा से अत्यंत क्रोधित हुए और उसे अनंतकाल तक पृथ्वी पर ही भटकने का श्राप दिया और यह भी कहा कि उसके शरीर पर कुछ ऐसे घाव होंगे जो कभी नहीं भरेंगे।

वेद व्यास: महाभारत के रचनाकार एवं ऋषि पराशर और सत्यवती की संतान जिन्हें अष्ट चिरंजीवियों में से एक माना जाता है।

परशुराम- भगवान विष्णु के अंशावतार जिन्होंने भोलेनाथ से अमरत्व का वरदान प्राप्त किया था।

राजा बलि- ऐसे दानवीर राजा जिन्होंने वामन रूप में आए भगवान श्री हरि विष्णु के समक्ष अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था और अंत में सबकुछ दान में देने के पश्चात स्वयं को भी उनके हवाले कर दिया। इससे भगवान विष्णु इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने बलि को पातल का शासक बनाया और उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान भी दिया।

 

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Web Title: These are the great men of ancient India who have got the blessings of immortality

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