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सभी जानते हैं कि शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। जो भी भक्त शनिदेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं वह विधिवत रुप से पूजा करते हैं। शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा के लिए बहुत ही शुभ माना जाता हैं। शनिवार के दिन शनिदेव के भक्त उनकी पूजा अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि धर्मराज होने की वजह से प्राय: शनि पापी व्यक्तियों के लिए दुख और कष्टकारक होता है, लेकिन ईमानदारों के लिए यह यश, धन, पद और सम्मान का ग्रह है। और शनिदेव को धर्म व न्याय के प्रतीक शनिदेव को ही सुख-संपत्ति, वैभव और मोक्ष देने वाला ग्रह माना जाता है।

कौन हैं शनिदेव- ज्योतिषशास्त्र के दार्शनिक खंड अनुसार सूर्य पुत्र शनि को पापी ग्रह माना गया है और इसे नवग्रह में न्यायाधीश की उपलब्धि प्राप्त है। ये कृष्ण वर्ण के हैं तथा इनका लंगड़ाकर चलना इनकी धीमी गति का कारण है। शनि का वाहन कौआ है।  शास्त्रनुसार यदि कुण्डली में सूर्य पर शनि का प्रभाव हो तो व्यक्ति के पितृ सुखों में कमी देखी जाती है। शनि को मारक, अशुभ व दुख का कारक माना जाता है। शास्त्र उत्तर कालामृत के अनुसार शनि का प्रभाव कमजोर स्वास्थ्य, बाधाएं, रोग, मृत्यु, दीर्घायु, नंपुसकता, वृद्धावस्था, काला रंग, क्रोध, विकलांगता व संघर्ष का कारण बनता है। शनि अनिष्टकारक, अशुभ और दु:ख प्रदाता है, पर वास्तव में ऐसा नहीं है। मानव जीवन में शनि के सकारात्मक प्रभाव भी बहुत है। शनि संतुलन व न्याय के ग्रह हैं। यह सूर्य के पुत्र माने जाते हैं। यह नीले रंग के ग्रह हैं, जिससे नीले रंग की किरणें पृथ्वी पर निरंतर पड़ती रहती हैं। वैदिक ज्योतिष के मुताबिक़ भिन्न-भिन्न भावों में शनि का फल भी भिन्न-भिन्न होता है। शनि सूर्य-पुत्र के नाम से ख्यात है। कहते हैं कि शनि जिसे चाहे राजा से रंक बना देता है और रंक से राजा।

इस विधि विधान से करें पूजा -
शनि देव की पूजा के लिए कड़ी अराधना करनी होती है। खासकर शनि की साढ़ेसाती से परेशान लोगों को शनिदेव की पूजा पूरे विधि विधान से करनी चाहिए। शनिवार को प्रात:काल उठकर स्‍नानादि कर शुद्ध हों। इसके बाद लकड़ी के पाटे पर एक काला कपड़ा बिछाकर उस पर शनिदेव की प्रतिमा रखें।

इसके बाद उनके सामने के दोनों कोनों में घी का दीपक जलाएं व सुपारी चढ़ाएं। फिर शनिदेव को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र से स्नान कराएं। उन पर काले या फिर नीले रंग के फूल चढाएं। अब उनके गुलाल, सिंदूर, कुमकुम व काजल लगाए। पूजा में तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य समर्पित करें। इस दौरान शनि गायत्री मंत्र, "ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्", का कम से कम एक माला जप करें। शनि की पूजा करने वालों का दूसरों के प्रति व्यवहार अच्छा होना चाहिए। इन लोगों को गरीबों, दीन दुखियों और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।

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Web Title: saturday measures

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