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हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। जिस दिन सभी भगवान श्रीकृष्ण जी की पूजा और व्रत रखते हैं, और भगवान अपने भक्तों पर कृपादृष्टि बनाएं रखते हैं। इस पावन पर्व पर भगवान कृष्ण के मंदिरों में बड़ी धूम देखने को मिलती है। अब श्री कृष्ण की बात आती है सबसे पहले याद आती हैं राधा। राधा कृष्ण की प्रेम कहानी। वो कहानी जो अधूरी तो रह गई लेकिन दुनिया भर को सीखा गई कि प्यार क्या है। 

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माखन चोर और रास रसैया की पूजा तब तक अधूरी है जब तक उनके साथ राधा का नाम ना लिया जाए। कृष्ण और राधा का प्रेम बेहद ही अलौकिक और पवित्र है, बावजूद इसके राधा केवल कृष्ण की प्रेमिका ही बनकर रह गईं, वो उनकी पत्नी नहीं बन पाई , आखिर क्यों ऐसा हुआ। इस मौके पर भक्तों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि भगवान कृष्ण ने राधा से प्रेम के बावजूद उनसे शादी नहीं की। भगवान कृष्ण ने रुक्मिनी से शादी की। इतना ही नहीं। ऐसे में भक्तों के मन में एक और सवाल उठ रहा है कि भगवान कृष्ण की पत्नी रुक्मिनी थीं तो फिर उनके साथ उनकी तस्वीरें क्यों नहीं दिखती। भगवान कृष्ण की तस्वीरें सिर्फ राधा के साथ ही क्यों दिखती है।

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दरअसल श्रीकृष्ण और राधा के बीच जो प्रेम था वो निस्वार्थ था। राधा जानती थीं कि श्री कृष्ण भगवान हैं और वो खुद एक इंसान। एक इंसान और भगवान का शारीरिक मिलन कभी नहीं हो सकता इसलिए राधा ने कृष्ण से कभी शादी को लेकर कुछ नहीं कहा। वहीं श्रीकृष्ण को भी पता था कि उनका प्रेम अनंत हैं। वो राधा से इतना प्यार करते थे कि राधे उनकी आत्मा थीं। अब कोई अपनी आत्मा से कैसे विवाह करे। हमें यही चीज समझनी चाहिए। अगर आप किसी से प्रेम करते हैं तो उसे पाने की इच्छा मत रखिए क्योंकि वो आपमें बसा हुआ है। आपने उसे प्रेम करके ही उसे पा लिया है। शारीरिक रूप या सामाजिक रूप से उसे अपना बनाना निस्वार्थ प्रेम नहीं।

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Web Title: Janmashtami Special story

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