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सोरठि महला ९ ॥ इह जगि मीतु न देखिओ कोई ॥ सगल जगतु अपनै सुखि लागिओ दुख मै संगि न होई ॥१॥ रहाउ ॥ दारा मीत पूत सनबंधी सगरे धन सिउ लागे ॥ जब ही निरधन देखिओ नर कउ संगु छाडि सभ भागे ॥१॥

हे बही! इस जगत में कोई (अंत तक साथ निभाने वाला) मित्र (मैने) नहीं देखा। सारा संसार अपने सुख में ही जुटता पड़ा है। दुःख में (कोई किसी का) साथी नहीं बनता।१।रहाउ। हे भाई! स्त्री, मित्र, पुत्र, रिश्तेदार-यह सरे धन से (ही) मोह करते हैं। जब यह मनुख को कंगाल देखते हैं, (तभी) साथ छोड़ कर भाग जाते हैं।१।


 

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Web Title: Hukamnama sri harmandir sahib ji 17 september

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