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रागु सूही छंत महला ३ घरु २ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ सुख सोहिलड़ा हरि धिआवहु ॥ गुरमुखि हरि फलु पावहु ॥ गुरमुखि फलु पावहु हरि नामु धिआवहु जनम जनम के दूख निवारे ॥ बलिहारी गुर अपणे विटहु जिनि कारज सभि सवारे ॥ हरि प्रभु क्रिपा करे हरि जापहु सुख फल हरि जन पावहु ॥ नानकु कहै सुणहु जन भाई सुख सोहिलड़ा हरि धिआवहु ॥१॥ 

राग सूही, घर २ में गुरु अमरदास जी की बाणी 'छंत' अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। हे भाई जनों! आत्मिक आनंद देने वाले प्रभु की सिफत-सलाह का गीत गया करो। गुरु की सरन आ कर (सिफत-सलाह का गीत गाने से) परमात्मा के से से (इस का) फल प्राप्त करोगे। गुरु की सरन आ के परमात्मा का नाम सुमिरन करो, परमात्मा का नाम अनेकों जन्मों के दुःख दूर कर देता है। जिस गुरु ने तुम्हारे (लोक परलोक के) सारे काम स्वर दिए हैं, उस अपने गुरु से बलिहारे जाओ। परमात्मा का नाम जपा करो। हरी-प्रभु कृपा करेगा, (उस के दर से) आत्मिक आनंद का फल प्राप्त कर लोगे। नानक कहता है की हे भाई जनों! आत्मिक आनंद देने वाले प्रभु की सिफत सलाह का गीत गाते रहा करो॥१॥


 

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Web Title: Hukamnama Sri Harimandir Sahib Ji 24 june

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