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धनासरी महला ४ ॥ हरि हरि बूंद भए हरि सुआमी हम चात्रिक बिलल बिललाती ॥ हरि हरि क्रिपा करहु प्रभ अपनी मुखि देवहु हरि निमखाती ॥१॥ हरि बिनु रहि न सकउ इक राती ॥ जिउ बिनु अमलै अमली मरि जाई है तिउ हरि बिनु हम मरि जाती ॥ रहाउ ॥

हे हरी! हे स्वामी! मैं पपीहा तेरे नाम-बूँद (नाम की बूँद) के लिए तड़प रहा हूँ। (कृपा करो), तेरा नाम मेरे लिए जीवन बूँद बन जाए। हे हरी! हे प्रभु! अपनी कृपा करो, आँख के झपकने जितने समय के लिए ही मेरे मुख में (अपने नाम की शांति) की बूँद दाल दे।१। परमात्मा के नाम के बिना मैं पल भर के लिए भी नहीं रह सकता। जैसे (अफीम आदि) के नशे के बिना अमली(नशे का आदि) मनुख नहीं रह सकता, तड़प उठता है, उसी प्रकार परमात्मा के नाम के बिना मैं घबरा जाता हूँ।रहाउ।

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Web Title: Hukamnama Sri Harimandir Sahib Ji 23 May

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