image

सोरठि महला ५ ॥ सतिगुर पूरे भाणा ॥ ता जपिआ नामु रमाणा ॥ गोबिंद किरपा धारी ॥ प्रभि राखी पैज हमारी ॥१॥ हरि के चरन सदा सुखदाई ॥ जो इछहि सोई फलु पावहि बिरथी आस न जाई ॥१॥ रहाउ ॥ क्रिपा करे जिसु प्रानपति दाता सोई संतु गुण गावै ॥ प्रेम भगति ता का मनु लीणा पारब्रहम मनि भावै ॥२॥

(हे भाई!) जब गुरु को अच्छा लगता है, जब गुरु प्रसन्न होता है) तब ही परमात्मा का नाम जपा जा सकता है। परमात्मा ने कृपा की (गुरु मिलाया! गुरु की कृपा से हमना नाम सुमिरा, तब) परमात्मा ने हमारी लाज रख ली (हमे ठगने से बचा लिया)।१। हे भाई! परमात्मा के चरण सदा सुख देने वाले हैं। ( जो मनुख हरी-चरणों का सहारा लेते हैं, वेह) जो कुछ (परमात्मा से) मांगते हैं वो ही फल प्राप्त कर लेते हैं। (परमात्मा के ऊपर राखी हुई को भी) आस खली नहीं जाती।१।रहाउ। हे भाई! जीवन का मालिक दातार प्रभु जिस मनुख ऊपर कृपा करता है वह संत (सवभाव बन जाता है, और) परमात्मा के सिफत सलाह के गीत गता है। उस मनुख का मन परमात्मा की प्यार-भरी भक्ति में मस्त हो जाता है, वह मनुख परमात्मा के मन को प्यारा लगने लग जाता है।

DainikSavera APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS

Web Title: Hukamnama Sri Harimandir Sahib Ji 22 May

More News From dharam

Next Stories
image

free stats