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हिन्दू धर्म में हर व्रत और त्योहार का अपना-अपना खास स्थान है, जिसमें सभी व्रत कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसी तरह देवोत्थानी एकादशी का भी बहुत महत्व है। देवोत्थानी एकादशी को प्रबोधिनी या देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। देवोत्थानी एकादशी के बाद ही सभी तरह के मांगलिक कार्य सम्पन्न किए जाते हैं तो आइए हम आपको देवोत्थानी एकादशी के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं।

विशेष है देवोत्थानी एकादशी-
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थानी एकादशी मनायी जाती है। इस एकादशी का नाम देवोत्थानी एकादशी इसलिए है क्योंकि इस भगवान विष्णु चार महीने शयन के पश्चात उठते हैं। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन करते हैं। भगवान विष्णु के शयनकाल के दौरान चार महीने तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। इसीलिए देवोत्थानी  एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के पश्चात सभी प्रकार शुभ तथा मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। इसलिए दिन तुलसी जी विवाह भगवान विष्णु के साथ कराया जाता है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली के सात दिन बाद देवोत्थानी  एकादशी के दिन भगवान विष्णु विश्राम से जागृत होते हैं और सृष्टि का कार्य-भार देखते हैं। सभी प्रकार के शादी-ब्याह या मांगलिक कार्य इस एकादशी से शुरू होते है। 
 
देवोत्थानी एकादशी का शुभ मुहूर्त-
देवोत्थानी एकादशी: 8 नवंबर 2019
एकादशी तिथि शुरू होगी : 07 नवंबर 2019 की सुबह 09 बजकर 55 मिनट से
एकादशी तिथि खत्म होगी: 08 नवंबर 2019 को दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक

पौराणिक कथा-
एक बार भगवान विष्णु से लक्ष्मी जी ने कहा कि बहुत दिनों तक दिन-रात जागने के बाद आप लाखों वर्षों तक सोए रहते हैं। इस कारण से सभी प्राणियों  और जगत का नाश होता है। जगत के कल्याण हेतु आप ऐसा न करें बल्कि हर साल कुछ समय के नींद ले लिया करें। लक्ष्मी जी की बात सुनकर भगवान विष्णु मुस्कुराते हुए बोले देवी मेरे जागरण से तुम्हें भी कष्ट होता है इसलिए हर साल वर्षा ऋतु में चार महीने शयन करूंगा। इस समय तुमको और अन्य देवगणों को अवकाश मिल जाएगा। साथ ही विष्णु भगवान ने कहा कि मेरी यह निद्रा अल्पकालीन होगी तथा मेरे भक्तों हेतु भी मंगलकारी होगी। उसके बाद मेरे जाग्रत होने पर सभी शुभ कार्य होंगे।
 
इस एकादशी पर ऐसे करें पूजा-
प्रबोधिनी एकादशी बहुत खास होती है इसलिए इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें जगाने का आह्वान करें। एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और विष्णु भगवान का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें। उसके बाद घर की सफाई कर आंगन में विष्णु भगवान के चरण बनाएं। साथ ही एक गोखली में सभी तरह की मिठाइयां और फल भरकर किसी डलिया से ढक कर रख दें। इसके अलावा रात में पूजा घर और घर के बाहर दिए जलाने चाहिए और रात्रि में सभी घर वालों को विष्णु भगवान के साथ सभी देवी-देवताओं की पूजा करें।
 
देवोत्थानी एकादशी के दिन तुलसी विवाह- 
देवोत्थानी एकादशी की एक खास बात यह है कि इस दिन ही तुलसी जी का विवाह भी आयोजित किया जाता है। यह विवाह तुलसी के पौधे तथा भगवान विष्‍णु के एक रूप शालीग्राम के बीच होती है। यह विवाह भी आम शादी की तरह ही बहुत धूमधाम से होता है। भक्त इस विवाह में बहुत श्रद्धा से हिस्सा लेते हैं। 
 

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Web Title: Devothani Ekadashi 2019

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