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जब भी आप कहीं बाहर जाते हैं, तो हाईवे पर लगने वाले टोल पर जब आप पैसे देते हैं तो जो बकाया होता है, उसमें ज्यादातर बकाया राशि में टोल कर्मी सिक्के वापिस देता है। इन सिक्कों में अधिकतर नंबर 10 के सिक्कों के होते हैं। इसके पीछे की वजह कुछ भी हो सकती हैं, लेकिन आज ये खबर पढ़ने के बाद आप ऐसे मिलने वाले सिक्कों की जांच जरूर करेंगे। 

हरियाणा पुलिस ने हाल ही में नकली सिक्के बनाने वाली एक फैक्ट्री पकड़ी है। सिक्के बनाने वाले और बाज़ार में उन्हें चलाने वाले लोग भी पकड़े गए हैं। बता दें कि इस फैक्ट्री में 10 और 5 रुपये के सिक्के बनाए जा रहे थे। इस फैक्ट्री को फरीदाबाद के बहादुरगढ़ में चलाया जा रहा था। पुलिस ने जब इन लोगों से सख्ती से पूछताछ की तो खुलासा हुआ कि किस तरह से वह इन नकली सिक्कों को बाजार में बेचते हैं। 

अन्य अरोपियों के साथ-साथ एक युवती को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि युवती तैयार नकली सिक्कों की मार्केटिंग करती थी। युवती ने पंजाब नेशनल बैंक के नाम से एक फर्जी लेटर तैयार किया हुआ था। इस लेटर के अनुसार युवती सिक्के चलाने के लिए बैंक की ओर से नियुक्त की गई थी। खास बात ये है कि सिक्के बनाने वाला ये गिरोह सिक्को की पैकिंग के बाद उस पर टकसाल की मोहर भी लगाता था। जिससे किसी को कोई शक न हो।

आरोपी युवती के अनुसार सिक्के चलाने के लिए उनका सॉफ्ट टॉरगेट टोल प्लाजा होते हैं। यहां आसानी से बड़ी संख्या में सिक्के चल जाते हैं। इसके अलावा दूसरे शहरों में ऐसी बड़ी दुकाने तलाशी जाती हैं जहां ग्राहकों की भीड़-भाड़ ज्यादा रहती है।

मोटा कमीशन मिलने के लालच में हर कोई आसानी से सिक्के लेने को तैयार हो जाता है। आरोपी 60 से 70 रुपये में 100 रुपये के सिक्के देते थे। ज्यादा पूछताछ होने पर बताते थे कि बैंक के पास सिक्के बहुत हैं और टॉरगेट के हिसाब से बेचने भी हैं तो इसलिए ऑफर के साथ बेचे जा रहे हैं।

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Web Title: False: So does the toll plaza cashier pay 10 and 5 rupees coins!

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