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गुरदासपुर: आर्मी का एक नौजवान एक ठग के हत्थे ऐसा चढ़ा गया कि उसने 40,000 रुपए का नुक्सान ही नहीं करवाया बल्कि अपनी नौकरी भी खतरे में डाल ली है। गांव अब्बल खैर निवासी सेना के जवान योगेश सैनी पुत्र सुरेंद्र मोहन ने बताया कि 29 नवंबर, 2018 में जब वह पठानकोट के आर्मी हैडक्वार्टर में तैनात था, तब उसने खरीद-फरोख्त करने वाली मोबाइल एप्प ओ.एल.एक्स. पर सिर्फ पांच महीने प्रयोग किए गए एप्पल-7 मोबाइल फोन का विज्ञापन देखा और बताए गए फोन नंबर पर विक्रेता से संपर्क किया। विक्रेता से व्हाट्सएप्प पर उसकी चैट होने लगी। फोन का सौदा 22,000 रुपए में तय हो गया।

विक्रेता ने भी खुद को आर्मी का ही जवान बताते हुए अपना सेना का आई कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड फोन का बिल इत्यादि भेज दिए और एक अन्य फोन नंबर दिया और उसको पैसे पे.टी.एम. के जरिए उस नंबर में भेजने के लिए कहा। योगेश सैनी ने 22,000 रुपए उस नंबर के पे.टी.एम. अकाऊंट में डाल दिए। विक्रेता ने उससे उसके पहचान पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड की कॉपी भी मंगवा ली। कुछ दिनों बाद उसे फिर से फोन करके उसे 9250 रुपए ‘फोन पे एप्प’ पर डालने के लिए कहा गया जो बाद में रिफंड करने की बात विक्रेता ने की। फोन महंगा था और ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं किया गया था इसलिए लालच वश उसने यह पैसे भी ‘फोन पे’ अकांऊट में डाल दिए। इस तरह करके कथित सेना के जवान ने उससे 40,500 रुपए से ज्यादा रकम ऐंठ ली मगर फोन नहीं भेजा।

उल्टा पीड़ित के खिलाफ किसी ने ठगी की शिकायत दर्ज कराई

सैनी ने बताया कि 10 दिसंबर तक उसे फोन नहीं मिला तो उसने विक्रेता को व्हाटसएप्प कॉल की। जवाब मिला फोन खराब हो गया है और पैसे 20 दिसंबर तक उसके अकांऊट में डाल दिए जाएंगे। मगर पैसे नहीं डाले गए, उल्टा 28 दिसंबर को उसे पता चला कि किसी ने आर्मी हैडक्वार्टर में उसके खिलाफ ठगी की शिकायत कर दी है तो उसने घटना की विस्तृत जानकारी एक शिकायत पत्र के माध्यम से पुलिस प्रमुख पठानकोट को दे दी।

 बाद में अपने तौर पर जांच की तो खुलासा हुआ कि यह कोई बड़ा गिरोह है जो लोगों विशेषकर सेना के जवानों की जानकारियां आई कार्ड, पैन कार्ड इत्यादि हासिल करके लोगों के साथ ठगियां करता है क्योंकि जिस सेना के जवान साहिल कुमार का पहचान पत्र, आधार कार्ड और आई कार्ड उसे भेजा गया था, वह सांबा (जम्मू) का एक सीधा साधा फौजी निकला। योगेश के साथ ठगी करने के लिए साहिल के सिर्फ दस्तावेज इस्तेमाल किए गए थे, उसे आईफोन के बारे में कुछ भी पता नहीं था।

साइबर क्राइम को शिकायत के बावजूद नहीं कटी एफ.आई.आर

योगेश के पिता सुरेंद्र ने बताया कि जब उन्हें इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने योगेश से इसकी शिकायत पुलिस के साइबर क्राइम विंग में 11 जनवरी को करवाई। उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम को उन्होंने सारे प्रमाण उपलब्ध करवा दिए थे तथा यह भी बताया था कि गिरोह योगेश सैनी से धोखे से प्राप्त किया उसका पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज किसी के साथ ठगियां करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी भी मानते हैं कि यह एक बड़ा गिरोह है जिसके कई सदस्य हो सकते हैं। फिर भी अब तक दोषियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की गई है जबकि नौसरबाज अपना व्हाट्सएप नंबर अब तक भी प्रयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस की ढीली कार्रवाई के चलते यह लोग अभी भी अन्य लोगों को अपना शिकार बना रहे होंगे।

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