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नई दिल्ली: सरकार ने बड़े लेन-देन के लिए पैन के स्थान पर आधार कार्ड नंबर देने का विकल्प दिया है, लेकिन लेन-देन के लिए गलत आधार नंबर देने पर आपको 10 हजार का जुर्माना देना पड़ा सकता है। संबंधित प्रावधान और अधिसूचना जारी होने के बाद यह दंडात्मक प्रावधान 1 सितंबर, 2019 से लागू होने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेजों में आधार संख्या सही नहीं पाए जाने पर इसे प्रमाणित करने वाले को भी 10 हजार जुर्माना देना होगा। हालांकि जुर्माना आदेश से पहले संबंधित व्यक्ति की बात सुनी जाएगी।

एक अधिकारी ने बताया कि मौजूदा कानून को 5 जुलाई की बजट घोषणा के अनुरूप संशोधित किया जाएगा जिसमें पैन के स्थान पर आधार कार्ड के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। इसके लिए धारा 272बी में संशोधन किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर अधिनियम की धारा 272बी में पैन के उपयोग से संबंधित उल्लंघनों पर दंडात्मक प्रावधान हैं।

1.2 अरब के पास आधार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा था कि 1.2 अरब से अधिक भारतीयों के पास आधार कार्ड हैं। इसकी तुलना में केवल 22 करोड़ पैन हैं। करदाता पैन नंबर न होने पर आधार कार्ड नंबर से आयकर रिटर्न भर सकते हैं। बैंक खाता खोलने, कैड्रिट या डैबिट कार्ड के लिए आवेदन करने, होटल व रैस्तरां बिलों का भुगतान करने के लिए आधार नंबर इस्तेमाल कर सकते हैं।

22 करोड़ के पास है पैन
लेन-देन पर नजर रखने वाली कंसल्टिंग फर्म पी.डब्ल्यू.सी. से जुड़े अधिकारी कुलदीप कुमार ने बताया कि पैन के स्थान पर आधार का इस्तेमाल करने की इजाजत देने का फैसला स्वागत योग्य है। सरकार ने वित्तीय लेन-देन पर नजर रखने के लिए यह फैसला किया है। इसके जरिए अधिक से अधिक लोगों को कर के दायरे में लाया जा सकेगा।

कड़े होंगे प्रावधान :सरकार कानून संशोधन पर विचार कर रही है, ताकि आधार के लिए दंड प्रावधान को भी बढ़ाया जा सके। प्रस्तावित संशोधन में दंड और कठोर होगा। मौजूदा कानून अस्पष्ट है और मूल्यांकन अधिकारियों के विवेक पर निर्भर करता है।

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Web Title: False 'base' in transaction will be 10 thousand rupees fine

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