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नई दिल्ली: तकनीकी विकास के इस समय में युवाओं को अलग-अलग तरह की लतें लगती जा रही है। कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो बनाने का दीवाना है तो कोई सुबह उठने से लेकर रात के सोने तक इन्हीं सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर फोटोज़ डालने में वयस्त है। आज खाना खाने से पहले भी उसका फोटो अपडेट किया जाता है। ये सब अभी रुका नहीं था कि एंट्री होती है ऑनलाइन गेम्स की। पबजी नाम की गेम ने कईयो को अपना आदि बनाया। इस गेम की लत ऐसी लगी कई लोग जान भी गवां बैठे। लेकिन अब जो हुआ है वो और भी चौंकाने वाला है। खबर उत्तराखंड के पंत नगर के स्कूल में पढ़ने वाली एक 15 साल की लड़की की है।

उतराखंड की लड़की पुलिस को दिल्ली के कमला नगर में मिली है, वह यहां कैसे पहुंची? उसका जवाब आपका माथा सन्न कर देने वाला है। जवाब था वो, गेम खेलते-खेलते इतनी दूर आ पहुंची। यहां पहुंचना तो ठीक लेकिन इससे पहले वो कई और जगहों पर भी भटक आई थी। जब इस लड़की से पुलिस ने पूछ-ताछ की तो पहलें उसने बताया कि वो अपने भाई से मिलने आई है, जो कि एम्स में पढ़ता है। लेकिन थोड़ी और पूछ-ताछ के बाद असल बात सामने आईय़ ऐसी बात जिसे आप सीरियसली लें तो शायद अपने बच्चों से फोन छीन के रख लेंगें। 

दरअसल, ये लड़की अपनी मां के फोन पर ‘टैक्सी ड्राइवर-2’ नाम का कोरियन गेम खेला करती थी। जिसमें खेलने वाले व्यक्ति को लगता है कि वो गाड़ी चला रहा है और चलाते-चलाते उसे अपने साथियों को पीछे छोड़ना होता है। तो बस वो भी यही करने लगी थी, और इसी चक्कर में भारत के सात शहर घूम आई। पुलिस को लड़की के पास एक पेपर मिला जिसपर एक नंबर लिखा हुआ था। उस नंबर पर संपर्क करने के बाद पता चला कि वो लड़की पिछले 17 दिनों से गायब है। इसके बाद उसके परिवार वालों से संपर्क किया गया।

1 जुलाई को पंत नगर से निकलते वक्त लड़की के पास 14 हज़ार रुपए थे। दिल्ली पहुंचने से पहले वो ऋषिकेश, हरिद्वार, उदयपुर, जयपुर, अहमदाबाद और पुणे घूम के आ चुकी थी। पुलिस ने बताया कि वो कोई भी जगह चुनती और चलती रहती। दिन में शहर घूमती और रात में दूसरी जगह के लिए रवाना हो जाती। वैसे ही जैसे कोई टैक्सी ड्राइवर करता है। घर वालों ने लड़की की पहचान बताने से मना कर दिया है। लड़की की एक दोस्त ने आईएनएस को बताया कि वो अंतर्मुखी स्वभाव की थी, अपने में ही गुम रहा करती थी और अपना ज़्यादातर वक्त फोन में वीडियो गेम्स खेल कर बिताती थी।

डॉ. निमेश देसाई, डायरेक्टर, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेस, ने कहा कि अंतर्मुखी बच्चों के साथ मां-बाप को ज़्यादा वक्त गुज़ारना चाहिए, साथ ही ये भी कहा कि बच्चों को वर्चुअल वर्ल्ड से ज़्यादा रियल वर्ल्ड में रखना चाहिए। यह एक समस्या है जिसमें सरकार बहुत कुछ नहीं कर सकती है, लेकिन माता-पिता को अपने बच्चों को स्मार्टफोन देना बंद कर देना चाहिए और यदि आवश्यक हो तो उन्हें बुनियादी फोन देना चाहिए। गेम्स बहुत हैं, बेशक, खेलने में मज़ा भी बहुत आता है लेकिन ये अकेलापन दूर करने की दवाई कभी नहीं बनना चाहिए, वो तो शुक्र है वो लड़की मिल गई, वरना कोई बड़ी बात नहीं कि उसके साथ कोई हादसा पेश आ जाता।
 

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Web Title: Mobile game addiction to a 15-year-old girl, wandered in 10 cities in 18 days

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