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क्यों वे चीन में रहना चाहते हैं

हाल में चीन-भारत संबंधों में कुछ तनाव पैदा हुआ है। भारत में “चीन का बहिष्कार” मुहिम फिर से तेज होने लगी है। अब इसका निशाना चीन में पढ़ रहे और काम कर रहे भारतीयों पर भी लगा दिया गया। कुछ उत्तेजकों का दावा है कि अगर वे लोग भारत वापस नहीं जाते हैं, तो गद्दार बनेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने हाल में एक रिपोर्ट जारी की। शीर्षक है “गोलीबारी में पकड़ा, चीन में भारतीय लोग अपराध की भावना से लड़ रहे हैं”। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के पेइचिंग, शांगहाई, ताल्येन, शनचन, क्वांगचो आदि शहरों में बहुत से भारतीय लोग सॉफ्टवेयर, वस्त्र आदि व्यापार करते हैं। सीमा मुठभेड़ के बाद वे चौंक उठे कि खुद इंटरनेट पर हो रही “चीन का बहिष्कार” मुहिम में उलझ गए और गद्दार की लेबल लगाई गई।

उत्तेजक इंटरनेट पर शोर मचा रहे हैं कि भारतीयों को एकजुट होकर चीन का विरोध करना चाहिए, भारत चीन को हरा देगा…… लेकिन चीन में अधिकांश भारतीय लोग फिर भी चीन में रहना चाहते हैं।

कारण वास्तविक और सरल है। मुख्य कारण है कि कोविड-19 दुनिया भर में फैल रही है, लेकिन चीन में इसकी रोकथाम और नियंत्रण हो चुका है। वे चीन में सुरक्षित और शांतिपूर्ण से काम कर सकते हैं। संक्रमित या बेरोजगार होने पर चिंता करने की जरूरत नहीं। इसके अतिरिक्त चीनी लोग भारतियों को मित्र मानते हैं।

चीन के शनचन में रह रहे शशि शिरगुप्पी ने चीनी लड़की के साथ शादी की। उनके दो बच्चे हैं। शशि ने कहा कि उनके जीवन में कोई चिंता नहीं है। वे पूरी तरह स्वतंत्र हैं और पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध हैं। सभी लोग उनका ख्याल रखते हैं। वे भारत वापस नहीं जाना चाहते।

शशि लगातार 17 सालों से चीन में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीन और भारत के बीच हुई सीमा मुठभेड़ उनके जीवन पर ज्यादा मतलब नहीं रखती। महामारी की स्थिति में शांति बनाए रखना चाहिए।

चीन के ताल्येन शहर के सॉफ्टवेयर पार्क में काम कर रहे कुमार ने भी कहा कि चीन में सुरक्षित है। सीमा मुठभेड़ उनके काम और जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। चीन में महामारी के फैलाव को रोक दिया गया है। ताल्येन में सामान्य जीवन बहाल हो चुका है, शॉपिंग मॉल और सार्वजनिक परिवहन फिर से शुरू किया गया है। महामारी की स्थिति में चीन दुनिया में सबसे सुरक्षित जगह है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने कहा कि चीन में भारतीयों के विचार में हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा मुठभेड़ हुई, लेकिन वे गद्दार नहीं हैं, बस चीन में सुखमय जीवन बिताना चाहते हैं।

आपको बता दें कि अब 15,000 से अधिक भारतीय लोग ताल्येन के सॉफ्टवेयर पार्क में काम करते हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 में 6 लाख विदेशी लोग चीन में रहते हैं, अब करीब करोड़ तक हो चुकी है। उनमें लगभग 3 प्रतिशत भारतीय हैं।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)