avdertisement
china

टिप्पणीः "वॉल स्ट्रीट जर्नल" का तमाशा

3 फरवरी को अमेरिकी अखबार "वॉल स्ट्रीट जर्नल" में "पूर्वी एशिया में चीन असली बीमार आदमी है" शीर्षक एक आलेख प्रकाशित हुआ, जिसने दुनिया में बहुत से नेटिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। 20 फरवरी को इस अखबार के खुद के 53 कर्मचारियों ने भी अखबार के नेता को मेल भेजकर उन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का अनुरोध किया। मेल ने "वॉल स्ट्रीट जर्नल" के नेतागण से अखबार के पाठक, स्रोत, सहकर्मी और अपमानित व्यक्तियों से मांफी मांगने का अनुरोध किया। मेल में इन कर्मचारियों ने कहा कि यह एक गलत टाइटल है, जिस ने चीनियों समेत अनेक लोगों का अपमान किया है।

यह सर्वविदित है कि अमेरिका एक बहुजातीय देश है। नस्ल भेदभाव ठीक नहीं है और अंतर्राष्ट्रीय मापदंड का उल्लंघन करता है।"वॉल स्ट्रीट जर्नल" ने लोगों के ध्यान को खींचने के लिए रंगभेद के टाइटल का इस्तेमाल किया, जिसने बुनियादी नैतिकता का उल्लंघन किया है और बुनियादी करुणा और विवेक खोया है। 

ऑब्जर्वर नेटवर्क के लेखक शेन ई ने इस बात की समीक्षा की है कि "वॉल स्ट्रीट जर्नल" ने औपनिवेशिक रंग के शब्दों से अपनी जातिवादी श्रेष्ठता दिखायी। इस के पीछे यही है कि अमेरिकी अभिजात वर्ग ने वायरस के सहारे चीन के पुनरुत्थान को रोकने की आशा जतायी। अमेरिकी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के रेस स्टडीज के प्रोफेसर जॉई ने कहा कि अमेरिकी प्रमुख मीडिया ने इस तरह की रिपोर्ट दी, जिससे और अधिक चिंता व डरने की भावना पैदा होगी। साथ ही विश्व के विभिन्न स्थलों में चीनियों और अन्य एशियाई देशों के लोगों के प्रति शत्रुता की भावना फैली है, जो बिलकुल गलत है।

यह अपमानजनक है कि चीन के अनेक बार के गंभीर मामला उठाने और लाखों चीनियों की अपील के बावजूद "वॉल स्ट्रीट जर्नल" ने अभी भी स्वतंत्र समीक्षा देने और रिपोर्ट देने के बहाने से क्षमा मांगने से इंकार कर दिया और संबंधित जिम्मेदारों की सज़ा नहीं दी। इसे मद्देनजर चीन एक खामोश मेमना नहीं रहा। चीनी विदेश मंत्रालय ने 19 फरवरी को "वॉल स्ट्रीट जर्नल" के चीन में स्थित तीनों संवाददाताओं के प्रेस कार्ड रद्द कर दिये। चीनी विदेश प्रवक्ता कंग श्वांग ने कहा कि वे मीडिया, जो चीन को अपमानित करते हैं, नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और चीन पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से हमले करते हैं, को कीमत चुकानी पड़ेगी। यह चीन द्वारा खुद के हितों की रक्षा करने की न्यायपूर्ण कार्यवाई है, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पेओ ने बोलने की स्वतंत्रता के बहाने निंदा की। क्या "वॉल स्ट्रीट जर्नल" ने पोम्पेओ के मन की बातें बतायी हैं? यदि यह सच है, तो यह अमेरिकी राजनीति में उदासी की बात है।

हालिया महामारी के रोकथाम कार्य के कुंजीभूत वक्त पर "वॉल स्ट्रीट जर्नल" ने लोगों को एक खतरा सिगनल सौंपा है। यह न केवल विश्व महामारी रोकथाम कार्य को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि विश्व की शांति व विकास के लिए भी हानिकारक है।
"वॉल स्ट्रीट जर्नल" को शांति से सोचकर यथार्थ कार्यवाई से चीन और दुनिया को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
(साभार-चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)