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Mata vaishno Devi

रंग बिरंगी लाइटों और फूलों से सजा वैष्णों देवी भवन

कटरा : विश्व भर में कोरोना वायरस महामारी के चलते जहां देश के अन्य धर्मिक स्थलों के साथ ही विश्व प्रसिद्ध सौंदर्य के प्रतीक तीर्थ स्थल मां वैष्णो देवी के भवन में भी आने वाली यात्री पूरी तरह से स्थगित हैं, जिसके चलते देश के कोने-कोने से आने वाले इच्छाचुक श्रद्धालु चैत्र नवरात्रों के चलते भले ही वैष्णों देवी भवन में फूलों व रंग-बिरंगी लाइटों से हुई भव्य सजावट, शतचंडी महायज्ञ, सुबह-शाम हो रही दिव्य आरती आदि का करीब से देखने का सौभाग्य प्राप्त नहीं कर पाए और पर दूसरी ओर घर में बैठकर एम.एच. श्रद्धा से मां वैष्णों देवी भवन से सुबह शाम दिव्य आरती व शतचंडी महायज्ञ का लाइव प्रसारण देख धन्य हो रहे हैं और मां वैष्णों देवी से प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द ही विश्व के साथ ही भारत इस महामारी से मुक्त हो और यात्र फिर से शुरू हो ताकि उन्हें दर्शनों का सौभाग्य मिल सके।

सातवें दिन होती है मां कालरात्रि की पूजा
 मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। नाम से ही जाहिर है कि इनका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि। काल से भी रक्षा करने वाली यह शक्ति है। इस देवी के तीन नेत्र हैं। ये तीनों ही नेत्र ब्रrांड के समान गोल हैं। इनकी सांसों से अग्नि निकलती रहती है। ये गंदर्भ की सवारी करती हैं। ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को वर देती है। दाहिनी ही तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। यानी भक्तों हमेशा निडर, निर्भय रहो। बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग है। इनका रूप भले ही भयंकर हो लेकिन ये सदैव शुभ फल देने वाली मां हैं। कालरात्रि की उपासना करने से ब्रrांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुलने लगते हैं और तमाम आसुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती हैं, इसलिए दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत उनके स्मरण से ही भाग जाते हैं। ये ग्रह बाधाओं को भी दूर करती हैं और अग्नि, जल, जंतु, शत्रु और रात्रि भय दूर हो जाते हैं। इनकी कृपा से भक्त हर तरह के भय से मुक्त हो जाता है।