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टिप्पणी: विषैला मेड इन चाइना ? मज़ाक है क्या!

कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों ने कोविड-19 को चीनी वायरस कहा। इसकी सहायता देने के लिये पश्चिम में कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं कि चीन से खरीदे गये उत्पाद वायरस ले जाते हैं, और मेड इन चाइना का विरोध कर रहे हैं। वास्तव में वे महामारी के बहाने नस्लीय भेदभाव और राजनीतिक आक्रमण कर रहे हैं, चीन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, और चीन व अन्य देशों के बीच विरोधाभास बनाने में व्यस्त हैं।

सच बात यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहले से ही अपनी सरकारी वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से यह कहा है कि कोविड-19 चीन के मालों द्वारा नहीं फैल सकता। हाल ही में प्रकाशित न्यू इंग्लैंड जरनल ऑफ़ मेडिसिन में जारी एक अध्ययन के अनुसार वस्तुओं पर कोविड-19 का सब से लंबा अस्तित्व समय केवल 72 घंटे हैं। यानी आवश्यक कीटाणुशोधन कदम उठाकर विभिन्न वस्तुएं वायरस के प्रसार-प्रचार करने का मुख्य स्रोत नहीं बन सकेंगी।

वर्तमान में विश्व के 180 से अधिक देशों व क्षेत्रों में महामारी पैदा हुई। अगर मेड इन चाइन वाली वस्तुएं वायरस का प्रसार-प्रचार कर सकेंगी, तो विश्व के सभी माल वायरस लेने से नहीं बच सके। बेशक वे लोग जानबूझकर विज्ञान व सामान्य जानकारी की उपेक्षा करके अफवाह फैल रहे हैं। वे केवल वायरस के प्रति लोगों के घबराहट का प्रयोग करके चीन को बर्बाद करना चाहते हैं।
(साभार---चाइना रेडियो इंटरनेशनल ,पेइचिंग)