Shani Temple Uttarakhand

शनिदेव के इस चमत्कारी मंदिर में जलती है अखंड ज्योति, दर्शन मात्र से कष्टों का होगा अंत

प्राचीन काल में बनें देवी-देवताओं के चमत्कारी और रहस्यमयी मंदिर आज भी सभी के आकर्षण का केंद्र बनता है। रहस्यमयी मंदिर के बारे में जानने के लिए सभी पर्यटक आते हैं। इसी तरह न्याय के देवता शनिदेव के मंदिरों में एक है,  देवभूमि उत्तराखंड के खरसाली में स्थित है, जो आज भी सभी के लिए एक रहस्य है। आइए जानते हैं शनिदेव के धाम के बारे में-

समुद्री तल से लगभग 7000 फुट की ऊंचाई पर-
शनिदेव का यह मंदिर समुद्री तल से लगभग 7000 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। मान्यता है कि भक्तों की भीड़ शनिदेव के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में होती है, सभी अपने कष्टों के अंत के लिए शनिदेव से प्रार्थना करते हैं। बताया जाता है कि शनिदेव का ये मंदिर पांडवों द्वारा बनाया गया है। यह मंदिर पांच मंजिला है, लेकिन बाहर से देखने से पता नहीं चल पाता कि यह मंदिर पांच मंजिला है। जानकारी के अनुसार, इस मंदिर के निर्माण में पत्थर और लकड़ी का उपयोग किया गया है।

मंदिर में जलती है अखंड ज्योति-
इस मंदिर में शनिदेव की कांस्य की मूर्ति विराजमान है और साथ ही यहां एक अखंड ज्योति भी मौजूद है। मान्यता है कि इस अखंड ज्योति के दर्शन मात्र से ही जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं और शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है। कहते हैं कि इस मंदिर में साल में एक बार चमत्कार होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिर के ऊपर रखे घड़े खुद बदल जाते हैं। बताया जाता है कि इस दिन जो भक्त शनि मंदिर में आता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

बहन यमुना से मिलने आते है शनिदेव-
यहां प्रचलित किंवदंतियों के अनुसार प्रतिवर्ष अक्षय तृतीय पर शनि देव यमुनोत्री धाम में अपनी बहन यमुना से मिलकर खरसाली लौटते हैं। भाईदूज या यम द्वितिया के त्यौहार यमुना को खरसाली ले जा सकते हैं, ये पर्व दिवाली के दो दिन बाद आता है। शनिदेव और देवी यमुना को पूजा-पाठ कर के एक धार्मिक यात्रा के साथ ले जाया जाता है। मंदिर में शनि देव 12 महीने तक विराजमान रहते हैं और सावन की संक्रांति में खरसाली में तीन दिवसीय शनि देव मेला भी आयोजित किया जाता है।