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Shabri Jayanti 2020: जानिए शबरी जयंती पर कैसे करें पूजा और इसका महत्व...

हिन्दू धर्म में हर एक दिन का अपना-अपना खास स्थान होता है और सभी इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करते हैं। आज शबरी जयंती है। हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है। इस बार 15 फरवरी को है। रामायण काल में शबरी ने ही प्रभु श्रीराम को जूठे बेर खिलाए थे। इसी कारण शबरी को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। बता दें कि शबरीमाला मंदिर में इस दिन विशेष तौर पर मेला लगता हैं और पूजन अर्चना भी होती हैं।

बता दें कि माता शबरी को देवी का स्थान प्राप्त हुआ और साथ ही साथ मोक्ष की प्राप्ति भी हुई शबरी जयंती के दिन शबरी को देवी स्वरूप में पूजा जाता हैं, यह जयंती श्रद्धा और भक्ति द्वारा मोक्ष प्राप्ति का प्रतीक माना जाता हैं शबरी देवी की पूजा करने से भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती हैं। वहीं एक कथा के मुताबिक एक दिन शबरी आश्रम के पास के तालाब में जल लेने गई वही पास में एक ऋषि तपस्या में लीन थे।

जब उन्होंने शबरी को जल लेते देखा तो उसे अछूत कहकर उस पर एक पत्थर मारा और उसकी चोट से बहते रक्त की एक बूंद से तालाब का सारा पानी रक्त में बदल गया। ऋषि द्वारा उसमें गंगा, यमुना सभी पवित्र नदियों का जल डाला गया मगर रक्त जल में नहीं बदला। कई सालों बाद जब श्रीराम सीता माता की खोज में वहां आए तब लोगों ने श्री राम से आग्रह किया कि वे तालाब के रक्त को जल में बदल दें।
 
श्रीराम ने ऋषि से तालाब का इतिहास पूछा। तब ​ऋषि ने शबरी और तालाब की कथा सुनाई। श्रीराम ने दुखी होकर कहा, हे गुरुवर, यह रक्त उस देवी शबरी का नहीं मेरे ह्रदय का हैं जिसे आपने अपशब्दों से घायल किया। श्रीराम का नाम सुनते ही शबरी दौड़ी चली आती हैं राम मेरे प्रभु कहती हुई जब वो तालाब के पास पहुंचती हैं तब उसके पैर की धूल तालाब में चली जाती हैं और तालाब का रक्त अपने आप जल में बदल जाता हैं।