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कोरोना काल में चंडीगढ़ का रिकवरी रेट सबसे ज्यादा, देश में मिला पहला स्थान

चंडीगढ़ः  देशभर में कोरोना के खिलाफ जंग को लेकर हर कोई अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा है जिसमें सबसे आगे हमारे देश के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ है जिनकी वजह से आज मरीज ठीक भी हो रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार की तरफ से आंकड़े जारी किए गए हैं, जिसमें पहले नंबर पर चंडीगढ़ के रिकवरी रेट को जगह मिली है। जिस पर पीजिए की तरफ से खुशी जाहिर की गई तो साथ ही अब पीजीआई चंडीगढ़ को रैपिड टेस्ट किट की वैलिडेशन चेक करने की भी जिम्मेदारी दी गई है।



विश्व भर में कोरोना की महामारी से हर कोई त्रस्त है तो वहीं भारत की बात की जाए तो सरकारों और प्रशासन की तरफ से अपने स्तर पर क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभाई जा रही हैं। ऐसे में अब भारत सरकार की तरफ से करुणा महामारी से ठीक होने वाले मरीजों को लेकर रिकवरी रेट जारी किया गया है जिसमें पहला नंबर चंडीगढ़ को मिला है, हालांकि टॉप 15 राज्यों के नाम इसमें शामिल किए गए हैं, जिसको लेकर पीजीआई चंडीगढ़ के डायरेक्टर जगत राम ने बताया कि किस तरह से मरीजों को लेकर बनाई गई रणनीति कि आखिर किस तरह के मरीज का कहां पर इलाज हो और उनको जिस तरह का इलाज दिया जाना चाहिए।  यह उसी के नतीजे हैं कि चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा मरीज ठीक हो रहे हैं।  इसी रिकवरी रेट के साथ चंडीगढ़ पहले स्थान पर जगह बनाने में कामयाब हो सका है जिसमें पीजी डायरेक्टर का कहना है कि आगे भी हमारी सवाल लगातार जारी है कि हर किसी ढंग से कोरोना के मरीजों का इलाज किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीज स्वस्थ होकर अपने घर जा सके।

82.3 प्रतिशत रिकवरी रेट के साथ चंडीगढ़ की स्वास्थ्य सुविधाओं ने देश में अपनी जगह बनाई है जिसमें सबसे पहला स्थान हासिल किया तो वहीं अब एक और अहम जिम्मेदारी पीजीआई चंडीगढ़ को दी गई है। जिसमें देश भर में रैपिड टेस्ट किट का इस्तेमाल किया गया था लेकिन उसके नतीजे ज्यादा अच्छा ना होने के चलते उस पर रोक लगा दी गई, लेकिन एक बार फिर से करो ना टेस्ट को लेकर संख्या पढ़ाने की मंशा के साथ 300 रैपिड टेस्ट किट पीजीआई चंडीगढ़ को भेजी गई है ताकि वह इनकी वैलिडेशन चेक कर सके। हालांकि से ट्रायल नहीं कहा जा सकता लेकिन टेस्ट किट की प्रमाणिकता को लेकर पीजीआई चंडीगढ़ देखेगा कि इससे नतीजे कैसे आ रहे हैं। क्योंकि अगर नतीजे अच्छे रहते हैं तो रैपिड टेस्ट किट से बहुत कम समय में कोरोना मरीज का पता लगाया जा सकता है और आगे इलाज संभव है।