Ravidas Jayanti 2020

Ravidas Jayanti 2020: संत रविदास जयंती पर जानिए उनके कुछ प्रसिद्ध दोहों के बारे में

हर साल माघ पूर्णिमा के दिन संत रविवदास जयंती मनाई जाती है। संत रविदास जी के सभी भक्त अपने गुरु के नाम से झांकियां और शोभा यात्रा निकाली जाती है। संत रविदास जी ने हमेशा इस संसार को जाति और धर्म से ऊपर उठकर प्रेम का संदेश दिया है। उनके द्वारा कही गई बातें आज की परिस्थिति में भी सार्थक साबित होती हैं। उनके अनुसार ईश्वर की पूजा करने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए, साथ ही दिखावे से भी लोगों को दूर रहना चाहिए। आइए आज उनके जन्मदिन पर उनके द्वारा दिये कुछ संदेशों के बारे में जानते हैं-

मन चंगा तो कठौती में गंगा
अर्थ- संत रविदास जी द्वारा लिखा हुआ ये दोहा सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हुआ। इस दोहे का अर्थ यह है कि जिस व्यक्ति का मन पवित्र होता है, उसके बुलाने पर मां गंगा भी एक कठौती (बर्तन) में आ जाती हैं। आज के समय में भी लोगों को ये बात समझना चाहिए भक्ति का दिखावा और अलग-अलग आडंबर करने से कुछ प्राप्त नहीं होता। जरूरत तो बस इस चीज की है कि आपका मन पवित्र हो और आप में दूसरों के प्रति दया भावना हो।

कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै 
तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै
अर्थ- ईश्वर की भक्ति बड़े भाग्य से प्राप्त होती है। यदि आदमी में थोड़ा सा भी अभिमान नहीं है तो उसका जीवन सफल होना निश्चित है। ठीक वैसे ही जैसे एक विशाल शरीर वाला हाथी शक्कर के दानों को नहीं बीन सकता, लेकिन एक तुच्छ सी दिखने वाली चींटी शक्कर के दानों को आसानी से बीन सकती है।

जा देखे घिन उपजै, नरक कुंड में बास
प्रेम भगति सों ऊधरे, प्रगटत जन रैदास
अर्थ- जिस रविदास को देखने से लोगों को घृणा आती थी, जिनके रहने का स्थान नर्क-कुंड के समान था, ऐसे रविदास का ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाना, ऐसा ही है जैसे मनुष्य के रूप में दोबारा से उत्पत्ति हुई हो।

करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस
कर्म मानुष का धर्म है, सत् भाखै रविदास
अर्थ- आदमी को हमेशा कर्म करते रहना चाहिए, कभी भी कर्म के बदले मिलने वाले फल की आशा नही छोड़नी चाहिए, क्‍योंकि कर्म करना मनुष्य का धर्म है तो फल पाना हमारा सौभाग्य।